- केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों पर SC ने रोक लगाई है और पुनःसमीक्षा का आदेश दिया है
- सरकार इस मामले को पुनः समीक्षा के लिए देखेगी और न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए निर्णय करेगी
- उन्होंने कहा कि भारत में जाति व्यवस्था के दुष्परिणामों को पूरी तरह ठीक करने में समय लगेगा
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और पुनःसमीक्षा के आदेश पर कहा कि सरकार इन सब विषयों को एक बार फिर नए सिरे से देखेगी और उस पर निर्णय करेगी.यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और पुनःसमीक्षा के आदेश से संबंधित सवाल पर शेखावत ने कहा कि मुझे लगता है कि वह विषय अभी विचाराधीन है.न्यायालय ने उस पर आदेश दे दिया है.इसलिए अब जनता के लिए बोलने के लिए कुछ शेष नहीं बचा है. मैं जिस पद पर हूं, मुझे लगता है कि जो विषय न्यायालय में लंबित है. उस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, लेकिन मैं इतना मानता हूं कि समाज के एक बहुत बड़े वर्ग की भावनाएं उससे आहत हुई थीं.
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का स्मरण दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोधपुर में आपने हिंदू विस्थापितों की पीड़ा देखी है.जहां नागरिकता के लिए उन्हें 15-15 साल तक संघर्ष करना पड़ता था.उनके लिए जो कानून बना, उसे लेकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समाज के बीच खाई पैदा करने के लिए पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि वहां अल्पसंख्यकों का कोई विषय ही नहीं था.शेखावत ने कहा कि राफेल को लेकर भी कितना दुष्प्रचार किया गया, लेकिन आखिरकार सुप्रीम कोर्ट का डंडा पड़ने के बाद उस विषय को छोड़ना पड़ा.जनता ने हर बार उन्हें वोट के माध्यम से सबक सिखाया है, फिर भी वे मानने को तैयार नहीं हैं.
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