भारतीय उद्योग जगत के लिए 'ट्रिपल बोनांजा': भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बोले FICCI अध्यक्ष अनंत गोयनका

अनत गोयनका के मुताबिक, ये व्यापार समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण रीसेट का प्रतीक है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री और उनकी टीम द्वारा महीनों की बातचीत के बाद भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने से दुनिया के सबसे बड़े आयात बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा.

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  • भारत- अमेरिका के बीच बनी ट्रेड डील भारतीय उद्योग जगत के लिए 3गुना लाभकारी साबित होगी.
  • इस समझौते से टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा होगा.
  • ट्रेड डील से भारत के निर्यात में वृद्धि होगी, बाजार पहुंच व्यापक होगी और द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत होंगे.
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एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में उद्योग संघ FICCI के राष्ट्रीय अध्यक्ष और RPG Group के वाईस चेयरमैन अनंत गोयनका ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जो सहमति बनी है यह भारतीय उद्योग जगत के लिए एक ट्रिपल बोनांजा (Triple Bonanza) है. इससे पहले भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ, फिर एक स्थिर और महत्वपूर्ण बजट संसद में पेश किया गया. हमारा आंकलन है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से एक्सपोर्ट और अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए नई संभावनाएं बनी हैं.

FICCI का आंकलन है कि भारत और अमेरिका के बीच Trade Deal की वजह से सबसे ज्यादा फायदा टेक्सटाइल, Gems & Jewellery और Leather सेक्टर में होगा.

FICCI अध्यक्ष ने कहा, "परिधान, चमड़ा, रत्न और आभूषण और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को लाभ होने के साथ, इस समझौते में व्यापार विश्वास को मजबूत करने और द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने की क्षमता है. यदि प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जाता है, तो यह भारत के निर्यात वृद्धि पथ को सार्थक बढ़ावा दे सकता है, बाजार पहुंच को व्यापक बना सकता है और दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच निरंतर सहयोग के रणनीतिक महत्व को रेखांकित कर सकता है".

उधर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर Confederation of Indian Textile Industries (CITI) का आंकलन है कि इस डील के कार्यान्वयन से भारत से टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स का निर्यात 20% तक बढ़ सकता है. एनडीटीवी से बातचीत में CITI के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन ने कहा,

"यूरोपीय संघ को mother of all deals कहा गया. लेकिन कल रात अमेरिकी के साथ हुआ सौदा grandmother of all deals है. भारत पर 50% टैरिफ एक ही बार में घटकर 18% हो गया है और अब यह अन्य सभी पड़ोसियों और कपड़ा प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में सबसे कम है. भारतीय परिधान और घरेलू कपड़ा निर्यात सेक्टर स्वर्ण युग में प्रवेश कर रहा है, जहां हमारे पास अपने सभी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में समान या बेहतर खेल का मैदान होगा. हम पांच या 10 फीसदी बढ़ोतरी की बात नहीं कर रहे हैं. यदि आप अगले 5 से 6 वर्षों में क्षमता निर्माण करने में सक्षम हैं, तो मैं परिधान निर्यात में उच्च दोहरे अंक या यहां तक ​​कि 20% से अधिक की वृद्धि देख सकता हूं".

लेकिन इस अवसर का फायदा उठाने के लिए टेक्सटाइल सेक्टर में एक्सपोर्टरों को अपनी वर्तमान क्षमताएं बढ़ानी होंगी, जिससे वो अमेरिका जैसे बड़े बाजार में  मिले नए अवसर का फायदा उठा सकें.
 

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