- ट्रांस-अरुणाचल हाईवे परियोजना के मुआवजा घोटाले की जांच के तहत ED ने कई स्थानों पर छापेमारी शुरू की है.
- फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी कर सरकारी खजाने को लगभग ₹44 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया है.
- तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ने मुआवजे की राशि घटाई लेकिन मुआवजा वितरण में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार हुआ है.
अरुणाचल प्रदेश में ट्रांस-अरुणाचल हाईवे परियोजना से जुड़े बड़े मुआवजा घोटाले पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी. मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी जारी है.
क्या है घोटाला?
यह पूरा मामला हाईवे निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर मुआवजा दिलाने, फर्जी लाभार्थियों के नाम पर भुगतान कराने और अधिकारियों-निजी लोगों की मिलीभगत से जुड़ा है. ट्रांस-अरुणाचल हाईवे की कुल लंबाई 157.70 किलोमीटर है, जिसे याचुली, ज़ीरो और रागा सेक्टरों में बांटा गया था.
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जांच में सामने आया कि ज़ीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ने शुरुआत में ₹289.40 करोड़ मुआवजा तय किया था. लेकिन राज्य स्तर की बैठक में इसे घटाकर ₹198.56 करोड़ कर दिया गया. इसके बावजूद मुआवजा देने में भारी गड़बड़ी की गई.
ED को क्या मिला?
ED की जांच में पता चला कि कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी हुए. रकम सीधे सेविंग अकाउंट्स में भेजी गई. सरकारी खजाने को करीब ₹44 करोड़ का नुकसान पहुंचाया गया. आज की छापेमारी में ED को एक फर्जी लाभार्थी के ठिकाने से ₹2 करोड़ 20 लाख नकद भी बरामद हुए हैं.
किन पर कार्रवाई?
छापे 6 ठिकानों पर जारी हैं-
- तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर
- भूमि रिकॉर्ड से जुड़े अधिकारी
- एसेसमेंट तैयार करने वाले अफसर
- और कई निजी लाभार्थी
इनमें से 4 ठिकाने ईटानगर और आसपास, 1 लिखाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) और 1 आलो (मेचुका–चीन सीमा के पास) शामिल है. छापेमारी दुर्गम पहाड़ी इलाकों और संवेदनशील बॉर्डर क्षेत्रों तक फैल गई है.
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कैसे हुआ घोटाला?
ED के मुताबिक याजाली सेक्टर में न होने वाले ढांचों को कागजों में दिखाया गया. फर्जी एसेसमेंट तैयार किए गए. अयोग्य और गैर-मौजूद लाभार्थियों को मुआवजा दिलाया गया. अधिकारियों ने जाने-बूझकर पद का दुरुपयोग किया गया.
आगे क्या?
ED इस घोटाले में बड़ी गिरफ्तारी कर सकती है. चिह्नित बैंक खातों, संपत्तियों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की तैयारी चल रही है. एजेंसी के मुताबिक, घोटाले का आकार अब तक सामने आए आंकड़ों से कई गुना बड़ा हो सकता है.













