- TMC ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्यसभा सचिवालय में महाभियोग प्रस्ताव का नया नोटिस दिया है
- ज्ञानेश कुमार पर कुल 9 आरोप लगाए गए हैं और यह नोटिस पिछले महाभियोग प्रस्ताव से अलग है
- CEC को हटाने के लिए कम से कम लोकसभा के सौ सांसदों और राज्यसभा के पचास सांसदों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने को लेकर एक और नोटिस दिया गया है. ये नोटिस टीएमसी की तरफ से दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस नोटिस में कुल 73 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. साथ ही इसमें ज्ञानेश कुमार पर कुल 9 आरोप लगाए गए हैं. टीएमसी ने ये नोटिस राज्यसभा सचिवालय में दिया गया है. आपको बता दें कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने को लेकर यह कोई पहला नोटिस नहीं है. कुछ समय पहले भी विपक्ष की तरफ से एक ऐसा ही नोटिस दिया गया था.
इससे पहले भी टीएमसी ने ही CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का प्रस्ताव दिया था. उस दौरान टीएमसी ने संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग का नोटिस दिया था. इस नोटिस में 7 बिंदुओं का जिक्र किया गया था. ये 10 पन्नों से ज़्यादा का नोटिस है. इनमें बिहार में SIR प्रक्रिया का जिक्र भी था. कुछ राजनीतिक दलों के प्रति पक्षपात करने का भी आरोप लगाया गया था. सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का जिक्र भी इसमें किया गया है. टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पुष्टि की है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया गया था.
200 सांसदों ने नोटिस पर किये साइन
उस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के प्रस्ताव के लिए 200 से अधिक सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे. सूत्र के अनुसार, लोकसभा के 130 सांसदों ने और राज्यसभा के 63 सांसदों से ज्यादा ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे.
महाभियोग प्रस्ताव लाने का क्या है नियम?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस पर लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं. एक अन्य सूत्र के अनुसार, इस नोटिस पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' के सभी दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि, पार्टी अब आधिकारिक रूप से इस गठबंधन का हिस्सा नहीं है.
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