पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संकट अब खुलकर सामने आने लगा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई टीएमसी विधायक दल की अहम बैठक उस समय रद्द करनी पड़ी जब पार्टी के 80 में से महज 20 विधायक ही वहां पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक, कोरम पूरा नहीं होने की वजह से बैठक स्थगित करनी पड़ी. इसे टीएमसी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत माना जा रहा है.
यह बैठक विधायक दल के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने बुलाई थी. दिलचस्प बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले ही अभिषेक बनर्जी और आज सांसद कल्याण बनर्जी पर हमलों को लेकर पार्टी आक्रामक रुख अपनाए हुए है.
ममता के घर खाली कुर्सियां, बढ़े सवाल
टीएमसी सूत्रों का दावा है कि पार्टी के अधिकांश विधायक बैठक में नहीं पहुंचे. कई विधायक संपर्क से बाहर बताए गए, जबकि कुछ ने फोन तक नहीं उठाए. एक मौजूदा विधायक ने बताया कि उन्हें शनिवार को अभिषेक बनर्जी के स्टाफ की ओर से बैठक का फोन आया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में विधायक अनुपस्थित रहे.
हालांकि बैठक में फिरहाद हकीम, नयना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा, असीमा पात्रा और कुनाल घोष जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन कुल उपस्थिति बेहद कम रहने से पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
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कुणाल घोष का बचाव, लेकिन सवाल बरकरार
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कम उपस्थिति की वजह अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमलों के बाद नेताओं की व्यस्तता को बताया. लेकिन राजनीतिक हलकों में इस तर्क को नुकसान नियंत्रण (डैमेज कंट्रोल) की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. क्योंकि यह पहला मौका नहीं है जब टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया हो.
इस्तीफों ने बढ़ाईं लीडरशिप की मुश्किलें
हाल के दिनों में पार्टी को कई बड़े झटके लगे हैं. वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे चुके हैं. उन्होंने चुनावी नतीजों के बाद सार्वजनिक रूप से कहा था कि जनता का भरोसा पार्टी से उठ चुका है और कई बार उन्हें ऐसे मुद्दों पर भी पार्टी का बचाव करना पड़ा जिनसे लोग सहमत नहीं थे.
उनसे पहले सांसद काकोली घोष दस्तिदार भी सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं. उन्होंने पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति कथित अपमानजनक व्यवहार और नेतृत्व की निष्क्रियता पर सवाल उठाए थे.
कल्याण बनर्जी विवाद ने खोली अंदरूनी कलह
काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सांसद कल्याण बनर्जी पर महिला सांसदों के साथ कथित अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए थे. हालांकि कल्याण बनर्जी ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, लेकिन इस विवाद ने टीएमसी की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया.
विडंबना यह है कि कुछ समय पहले ही ममता बनर्जी ने काकोली की जगह कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नियुक्त किया था.
टीएमसी खत्म हो जाएगी? अपने ही नेता का दावा
टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का बयान भी पार्टी के लिए परेशानी बढ़ाने वाला साबित हुआ. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है. किसी सत्तारूढ़ दल के सांसद की ओर से आया यह बयान बंगाल की राजनीति में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है.
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हस्ताक्षर विवाद में फंसी विधायक
टीएमसी विधायक नयना बंद्योपाध्याय भी इन दिनों विवादों में हैं. उनके कथित हस्ताक्षर विवाद की जांच अब सीआईडी तक पहुंच चुकी है. हस्तलेखन विशेषज्ञों की मदद से दस्तावेजों की जांच की जा रही है. हालांकि विधायक का कहना है कि उन्होंने पार्टी निर्देशों के अनुसार ही हस्ताक्षर किए थे.
विपक्ष का हमला तेज
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने टीएमसी की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी अंदर से ढह रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, गुटबाजी और सत्ता के दुरुपयोग ने टीएमसी को कमजोर कर दिया है.
क्या ममता संभाल पाएंगी पार्टी?
80 में से सिर्फ 20 विधायकों का विधायक दल की बैठक में पहुंचना किसी साधारण संगठनात्मक चूक के रूप में नहीं देखा जा रहा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार, नेताओं के इस्तीफे, सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ती गुटबाजी ने टीएमसी को गंभीर आत्ममंथन की स्थिति में ला खड़ा किया है.
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या ममता बनर्जी एक बार फिर अपने राजनीतिक कौशल से पार्टी को एकजुट कर पाएंगी, या फिर टीएमसी के भीतर उठ रही बगावत की आवाजें बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत हैं.











