- बंगाल चुनाव में मिली करारी हार के बाद TMC अब अपने अभी तक के सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है.
- पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के बाद अब सांसद भी ममता बनर्जी और पार्टी आलाकमान से दूरी बनाने लगे हैं.
- शुक्रवार को ममता की बैठक में मात्र 5 MP और 8 MLA ही पहुंचे. आखिर TMC में तेज हुई इस बगावत की वजह क्या है?
TMC Crisis Inside Story: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी संकट खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. बंगाल चुनाव में मिली करारी हार से अभी पार्टी संभली भी नहीं थी कि अब नेता प्रतिपक्ष (LoP) के पद को लेकर तीखी बगावत सामने आ गई है, जिसने पार्टी के भीतर के गहरे मतभेद उजागर कर दिए हैं. सबकी निगाहें टीएमसी के 80 निर्वाचित विधायकों पर है, जिनका समर्थन पार्टी की दिशा तय करेगा. कई विधायकों से बातचीत में पर्दे के पीछे चल रही लामबंदी का खुलासा हुआ है. कई “बागी” विधायकों ने कहा कि उनकी निष्ठा अभी भी पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के प्रति है, लेकिन वे उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं.
एक महिला विधायक ने कहा, “हमने जीत ‘दीदी' की वजह से हासिल की और हम उनके संघर्ष को सलाम करते हैं,” लेकिन उन्होंने ममता के LoP चयन का विरोध करते हुए निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया.
ममता की मीटिंग में मात्र 5 सांसद और 8 विधायक ही पहुंचे
शुक्रवार को ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं की मीटिंग बुलाई थी, लेकिन इस बैठक में 41 में से सिर्फ 5 सांसद ही पहुंचे. वहीं तृणमूल कांग्रेस के इस बार कुल 80 विधायक हैं. बागी ग्रुप में 58 विधायक हैं. इनमें 2 निष्कासित शामिल हैं. बचे 22 विधायक. इनमें से एक को पुलिस ने पहले से गिरफ्तार किया हुआ है. इन 21 विधायकों में से भी मीटिंग में सिर्फ 8 विधायक ही उपस्थित हुए.
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केवल LoP नहीं विधायकों के गुस्से के कई और भी कारण
हालांकि, बागी विधायकों का कहना है कि उनकी दूरी का कारण सिर्फ LoP का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य में बदलता राजनीतिक माहौल और जनता में बढ़ता असंतोष भी है. कई विधायकों ने स्वीकार किया कि जमीन पर TMC के खिलाफ गुस्सा साफ दिख रहा है और इसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो रहा है.
'जब अभिषेक बनर्जी पर हमला हो सकता है हमारी क्या हैसियत'
दक्षिण 24 परगना में राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर अंडे, जूते और पत्थर फेंके जाने की घटना ने हालात को और गंभीर कर दिए.
विधायकों ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है. एक विधायक ने कहा, “अगर अभिषेक बनर्जी को इस तरह निशाना बनाया जा सकता है, तो हमारी सुरक्षा अब हमारे अपने हाथ में है.”
पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से भी डर
- कुछ विधायकों ने कथित रूप से हस्ताक्षर फर्जीवाड़े जैसे मुद्दों पर भी नाराजगी जताई. एक विधायक ने कहा, “ऐसा गैर-संवैधानिक काम हमारी छवि खराब करता है. मैं जनता को क्या जवाब दूं कि ये हस्ताक्षर चोरी कैसे हुई?”
- बागी खेमे के मुताबिक, एक और बड़ी चिंता पुलिस और जांच एजेंसियों की बढ़ती कार्रवाई है. एक विधायक ने कहा, “CID दो बार मेरे घर आ चुकी है. अगर मुझे गिरफ्तार किया गया, तो केवल मेरा परिवार प्रभावित होगा, पार्टी मदद के लिए नहीं आएगी.”
जावेद खान के बेटे को अवैध संपत्तियों के मामले में मिला नोटिस
विधायकों ने कुछ वरिष्ठ नेताओं और उनके परिवारों पर चल रही जांच का भी जिक्र किया. उदाहरण के तौर पर जावेद खान का नाम सामने आया, जिनके बेटे को कोलकाता में अवैध संपत्तियों के मामले में नोटिस मिला है. 24 मई को पश्चिम बंगाल शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा था कि अगर जवाब नहीं मिला तो अवैध निर्माण गिराए जाएंगे.
बागी विधायकों के लिए व्यक्तिगत राजनीतिक अस्तित्व बचाना प्राथमिकता
बागी विधायकों के लिए फिलहाल राजनीतिक और व्यक्तिगत अस्तित्व बचाना प्राथमिकता है. उनका मानना है कि अगर उन्होंने खुद को इन कानूनी और राजनीतिक संकटों से सुरक्षित नहीं किया, तो अगले पांच साल अपने क्षेत्रों में टिक पाना मुश्किल होगा. खासतौर पर तब, जब पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर पर सक्रिय नजर नहीं आ रहा.
कार्यकारिणी की बैठक में कई नई नियुक्तियां
कालीघाट में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बनाया गया, जबकि चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य अध्यक्ष नियुक्त किया गया. यह बदलाव पार्टी में असंतोष को नियंत्रित करने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
LoP विवाद को अदालत में चुनौती देंगी ममता
दूसरी ओर ममता बनर्जी LoP विवाद को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं, जिससे यह मामला अब कानूनी लड़ाई में बदल सकता है. इसी बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि ममता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में भी शामिल होंगे.
सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही टीएमसी
LoP विवाद ने टीएमसी को अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर झकझोर दिया है. कई नेता जेल में हैं, निकायों में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो चुके हैं और पूर्व सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप भी लगातार सामने आ रहे हैं. इन सभी हालातों को देखते हुए यह साफ लग रहा है कि टीएमसी अभी अपने सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है.
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