ये ट्रेड डील हमारे देशवासियों के लिए ढेर सारा अवसर लाने वाला है... यूएस के साथ डील पर बोले पीयूष गोयल

पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस डील के तहत किसानों के हितों का पूरी तरह से ख्याल रखा गया है. अमेरिका ने ही पहले टैरिफ लगाया और उसी ने खुद कम किया. ये एक पड़ाव है भारत के उज्जवल भविष्य का, साथ ही ये आगे आने वाले दिनों का शुभ संकेत भी है. 

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पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर दिया बड़ा बयान
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  • केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को देश के लिए नए अवसरों वाला बताया है.
  • पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार और ऊर्जा खरीद को लेकर बातचीत की थी.
  • पीयूष गोयल ने राहुल गांधी की नकारात्मक सोच और विपक्षी राजनीतिक रुख की आलोचना भी की.
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नई दिल्ली:

अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि ये डील हमारे देशवासियों के लिए बड़ी संख्या में नए अवसर लेकर आएगा. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों को संभाला है. इस डील से हर वर्ग के लोगों के लिए नए अवसर पैदा होगा. मैं आपको बता देना चाहता हूं कि दक्षिण एशिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत को सबसे बेहतर डील मिली है. इस डील में भारत के कृषि क्षेत्र का संरक्षण किया गया है.

उन्होंने कहा कि इस डील से एमएसएमई सेक्टर को भी खासा फायदा होगा. इस डील के तहत किसानों के हितों का पूरी तरह से ख्याल रखा गया है.  अमेरिका ने ही पहले टैरिफ लगाया और उसी ने खुद कम किया. ये एक पड़ाव है भारत के उज्जवल भविष्य का साथ ही ये आगे आने वाले दिनों का शुभ संकेत भी है. अभी इस डील की प्रक्रिया चल रही है. पीयूष गोयल ने आगे कहा कि जल्द ही इस डील को लेकर भारत और अमेरिका के बीच साझा बयान भी आएगा. 

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की सोच नकारा है. उनको देश के विकास से कोई लेना-देना नहीं है. वो सिर्फ अपने बयानों से लोगों को गुमराह करना चाहते हैं. मुझे नहीं लगता कि भारत का एक भी नागरिक राहुल गांधी के भ्रामक सोच के साथ खुदको जोड़ सकते हैं. राहुल गांधी एक नकारात्मक सोच के प्रतीक हैं. उनके साथ जुड़कर दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी भारत को मिल रहे नए अवसर को मानने से इनकार किया है.  इनको क्या भारत के विकास और देश की प्रगति से नफरत है?

राहुल गांधी की सोच ही नकारात्मक है, उन्हें माफी मांगनी चाहिए

राहुल गांधी को क्या हमारे देश के युवाओं से कोई नाराजगी है. उनको देश की जनता को जवाब देना हो. उनको देश की जनता को जवाब देना होगा कि वह अपनी नकारात्मक सोच से क्या चाहते हैं. इस प्रकार की ओछी सोच फैलाने का बात कर रहे हैं. वो भारत उज्जवल भविष्य नहीं चाहते. वो हर प्रकार से राजनीतिक अराजकता फैलाने की कोशिश करना चाहते हैं. वो हमारे आर्मी के सेना के जवानों पर कम विश्वास करते हैं. वो हमारे सेना के  ऊपर प्रश्नचिन्ह उठाते हैं.मुझे लगता है कि देश की जनता से राहुल गांधी हो, ममता बनर्जी हो, स्टालिन हो, अभिजीत बनर्जी हो उनको माफी मांगनी चाहिए. और अपने अनाप-सनाप के आरोपों पर दुख जताना चाहिए. 

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आपको बता दें कि अमेरिका ने  सोमवार (कल) की रात ही भारत पर लगे टैरिफ को कम करने का ऐलान किया था. अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत के बाद इसकी घोषणा की थी. उन्होंने साफ किया था कि अब भारत पर 50 फीसदी नहीं, बल्कि 18 फीसदी टैरिफ ही लगेगा. पीएम मोदी ने ट्रंप को ट्वीट कर धन्यवाद भी दिया है. 

वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदेगा भारत

ट्रंप ने सोमवार को ट्रूथ सोशल पर लिखा था कि आज सुबह भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी. वे मेरे सबसे करीबी दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के एक शक्तिशाली और सम्मानित नेता हैं. हमने व्यापार और रूस व यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने सहित कई विषयों पर चर्चा की. वे रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए. इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी, जिसमें हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं!

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टैरिफ कम करने पर ऐलान

यूएस प्रेसीडेंट ने आगे लिखा था कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मित्रता और सम्मान के कारण, और उनके अनुरोध पर, तत्काल प्रभाव से, हमने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति व्यक्त की है, जिसके तहत संयुक्त राज्य अमेरिका टैरिफ शुल्क को 25% से घटाकर 18% कर देगा. वे भी इसी प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका के विरुद्ध अपने शुल्क और गैर-शुल्क बाधाओं को शून्य तक कम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे. प्रधानमंत्री ने 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि, कोयला और कई अन्य उत्पादों के अलावा, "अमेरिकी उत्पाद खरीद" के उच्च स्तर पर प्रतिबद्धता भी जताई है.

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