तेलंगाना में माओवादी नेटवर्क टूटा: सोडी केशालू समेत 42 माओवादियों का सरेंडर, 800 ग्राम सोना के साथ ये मिला

Telangana Maoists Surrendered: PLGA बटालियन‑1 के अंतिम कमांडर सोडी केशालू ने 42 माओवादियों के साथ आत्मसमर्पण किया. पुलिस को 800 ग्राम सोना और 36 हथियार सौंपे गए. पढ़िए पूरी रिपोर्ट.

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तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के दौरान PLGA बटालियन 1 का अंतिम कमांडर सोडी केशलू और अन्य कैडर

Telangana Maoists Surrendered: वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है. प्रतिबंधित CPI (माओवादी) संगठन को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर‑1 के अंतिम कमांडर सोडी केशालू उर्फ सोडी केशा ने अपने 42 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इस हाई‑प्रोफाइल सरेंडर के दौरान माओवादियों ने न केवल भारी मात्रा में हथियार और गोला‑बारूद सौंपा, बल्कि 800 ग्राम सोना भी पुलिस के हवाले किया, जिसे संगठन का आपातकालीन और ऑपरेशनल फंड माना जा रहा है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोडी केशालू तेलंगाना‑छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय माओवादी नेटवर्क का एक प्रमुख चेहरा था और उसके ऊपर करीब 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इस आत्मसमर्पण को राज्य में माओवादी सैन्य ढांचे के लगभग अंत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि PLGA की यह बटालियन संगठन की सबसे मजबूत और संगठित इकाई मानी जाती थी.

सोडी केशालू: माओवादी संगठन का प्रमुख चेहरा

47 वर्षीय सोडी केशालू, जिन्हें सोडी मल्ला और निखिल के नाम से भी जाना जाता है, तेलंगाना–छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय माओवादी ढांचे के दूसरे सबसे बड़े कमांडर माने जाते थे. पुलिस के अनुसार, उनके ऊपर करीब 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था. वे वरिष्ठ माओवादी नेता बादिसे देवा के बाद इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली कमांडर थे.

Telangana Maoists Surrendered: तेलंगाना में माओवाद को बड़ा झटका

तीन दशक का उग्रवाद से जुड़ा सफर

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के एंटापाड़ गांव के रहने वाले सोडी केशालू ने वर्ष 1995 में बालाला संघम के माध्यम से माओवादी आंदोलन में प्रवेश किया था. वर्ष 2001 में वे औपचारिक रूप से सीपीआई (माओवादी) का हिस्सा बने. इसके बाद करीब 30 वर्षों तक उन्होंने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. वे किष्टाराम, कुंटा और साउथ बस्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में सक्रिय रहे. वर्ष 2021 में उन्हें पीएलजीए बटालियन में भेजा गया और 2023 में वे डिप्टी कमांडर बने. इसी साल बादिसे देवा के आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने बटालियन नंबर–1 की कमान संभाली थी.

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वरिष्ठ नेताओं और कैडरों का सामूहिक आत्मसमर्पण

शुक्रवार को हुए आत्मसमर्पण में केवल सोडी केशालू ही नहीं, बल्कि डिविजनल कमेटी के वरिष्ठ सदस्य, एरिया कमेटी लीडर, प्लाटून कमांडर और कई सशस्त्र कैडर भी शामिल रहे. ये सभी बस्तर क्षेत्र और तेलंगाना सीमा पर सक्रिय माओवादियों की सबसे मजबूत सैन्य इकाई का हिस्सा थे.

इन माओवादियों ने भी डाले हथियार

आत्मसमर्पण करने वालों में मादवी माड़ा उर्फ रविंदर, पुनेम सुक्कू, हेमला लाची उर्फ शीला और सोडी भीमा उर्फ रणजीत जैसे सक्रिय माओवादी नेता भी शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि इन नामों का संगठन के भीतर खास प्रभाव था.

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डॉक्टर और सप्लाई नेटवर्क का भी हुआ अंत

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में बटालियन से जुड़ा एक प्रशिक्षित माओवादी डॉक्टर भी शामिल है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि पीएलजीए बटालियन नंबर–1 का केवल सशस्त्र ढांचा ही नहीं, बल्कि उसका मेडिकल और लॉजिस्टिक नेटवर्क भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है.

भारी मात्रा में हथियार और सोना बरामद

आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने कुल 36 हथियार पुलिस को सौंपे. इनमें पांच एके-सीरीज राइफलें, चार एसएलआर, तीन इंसास राइफल, छह बैरल ग्रेनेड लांचर, एक 9 एमएम पिस्टल और दो रिवॉल्वर शामिल हैं. इसके साथ ही करीब 800 ग्राम सोना भी सौंपा गया, जो आठ 100-100 ग्राम की गोल्ड बिस्किट के रूप में था. पुलिस का मानना है कि यह माओवादियों का आपातकालीन और ऑपरेशनल फंड था.

तेलंगाना में माओवादी ढांचे के अंत का दावा

अधिकारियों का कहना है कि सोडी केशालू के आत्मसमर्पण, बादिसे देवा के पहले आत्मसमर्पण और हिड़मा नेटवर्क के निष्क्रिय होने के बाद तेलंगाना और आसपास के इलाकों में पीएलजीए अब संगठित सैन्य शक्ति नहीं रह गई है. पुलिस ने यह भी दावा किया कि राज्य में सीपीआई (माओवादी) की तेलंगाना स्टेट कमेटी पूरी तरह से खत्म हो चुकी है.

इस साल पहले भी हुए बड़े आत्मसमर्पण

तेलंगाना में इस वर्ष माओवादियों के कई बड़े आत्मसमर्पण देखने को मिले हैं.

  • 2 जनवरी को बादिसे देवा उर्फ देवन्ना ने 11 कैडरों के साथ आत्मसमर्पण किया था.
  • 22 फरवरी को वरिष्ठ नेता थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने 20 कैडरों के साथ हथियार डाले.
  • 7 मार्च को एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में 130 माओवादियों ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया था.

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