- तेलंगाना के करीमनगर जिले में पति-पत्नी की विवाद के कारण दो मासूम बेटियों को पुलिस स्टेशन में छोड़ दिया गया
- पति रवि कुमार और पत्नी ललिता काउंसलिंग के दौरान विवाद के कारण बच्चियों को साथ रखने से मना कर दिया
- पुलिसकर्मियों ने बच्चियों को संभाला और उनकी दादी को बुलाकर सुरक्षित सौंप दिया गया
Couple Abandons Daughters: तेलंगाना के करीमनगर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. यहां एक शादीशुदा जोड़े के बीच का विवाद इस कदर बढ़ गया कि वे अपनी दो मासूम बेटियों को ही पुलिस स्टेशन में लावारिस छोड़कर चले गए. हुआ यूं कि रवि कुमार और ललिता नाम के कपल थाने में काउंसलिंग कराने आए थे. इसी दौरान गुस्से से भरी मां ललिता ने अपना मंगलसूत्र और बिछिया उतारकर मेज पर पटक दिए और बच्चियों को साथ रखने से मना कर दिया.हद तो तब हो गई जब पिता रविकुमार भी रोती-बिलखती बेटियों को पीछे छोड़कर थाने से बाहर निकल गया. पुलिसकर्मियों ने किसी तरह बच्चों को संभाला और बाद में उनकी दादी को बुलाकर उनके हवाले किया.दिलचस्प ये भी है कि रवि और ललिता ने करीब 10 साल पहले प्रेम विवाह किया था.
काउंसलिंग के दौरान अचानक बिगड़ा माहौल
दरअसल दुकान चलाने वाले रवि कुमार और नर्सिंग की पढ़ाई कर रही ललिता के बीच लंबे समय से अनबन चल रही थी. बात जब पुलिस तक पहुंची तो सुलह के लिए दोनों को 28 अप्रैल को थाने बुलाया गया था. पुलिस को उम्मीद थी कि दोनों को समझा-बुझाकर घर भेज दिया जाएगा, लेकिन बातचीत के दौरान बहस इतनी बढ़ गई कि ललिता ने चीखते हुए कह दिया कि उसे अब न यह रिश्ता चाहिए और न ही ये बच्चे. इसके बाद वह मंगलसूत्र वहीं छोड़कर चली गई. थोड़ी ही देर में रवि भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए वहां से चला गया.
Telangana Family Dispute: इन्हीं दोनों मासूम बच्चियों को थाने में छोड़कर गुस्से में चले गए मां-बाप. अब दोनों बच्चियां अपनी दादी के पास सुरक्षित हैं.
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पुलिस वालों ने संभाला, दादी को सौंपा
अपने माता-पिता को इस तरह जाते देख दोनों मासूम बच्चियां बुरी तरह डर गईं और रोने लगीं. पुलिसकर्मियों ने जब रवि और ललिता को फोन मिलाया तो किसी ने कॉल नहीं उठाया. इसके बाद सब-इंस्पेक्टर अनवर और उनकी टीम ने बच्चियों को चुप कराया और उन्हें खाने-पीने का सामान दिया. काफी देर इंतजार करने के बाद पुलिस ने बच्चों की दादी को फोन कर थाने बुलाया और बच्चियों को उनके हाथों में सौंपा.
बच्चों के भविष्य पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल इस मामले में पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया है, लेकिन वे लगातार इस परिवार पर नजर बनाए हुए हैं. पुलिस अधिकारी अब समाज के कुछ बुजुर्गों के साथ मिलकर माता-पिता को समझाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बच्चों का बचपन बर्बाद न हो. पुलिस का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता उन बच्चियों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति है, जो अपने ही माता-पिता की नफरत के बीच सड़क पर आने जैसी स्थिति में पहुंच गई थीं.
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