- तेलंगाना सरकार ने बंजारा हिल्स स्थित मंत्री आवास की मरम्मत पर 76 लाख रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है.
- पूर्व क्रिकेटर और नए मंत्री अजहरुद्दीन को हाल ही में यह आवास आवंटित किया गया था और मरम्मत को जरूरी बताया है.
- मरम्मत में छत की वाटरप्रूफिंग, फर्श की टाइलिंग, UPVC खिड़कियां, मॉड्यूलर किचन और दीवारों की पेंटिंग शामिल हैं.
तेलंगाना सरकार एक बार फिर खर्चों को लेकर सवालों के घेरे में है. बंजारा हिल्स स्थित मंत्री आवास की मरम्मत पर 76 लाख रुपये की मंजूरी ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है. यह आवास पूर्व क्रिकेटर और नए मंत्री मोहम्मद आजहरुद्दीन को हाल ही में आवंटित किया गया था, लेकिन वित्तीय तंगी का हवाला देने वाली सरकार पर अब 'खर्च की प्राथमिकताएं उलटी' होने के आरोप जोर पकड़ रहे हैं.
क्या कहा गया है सरकारी आदेश में?
रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश (GO) के अनुसार, यह राशि सरकारी आवासीय भवनों के कैपिटल आउटले से मंजूर की गई है.
इस आवास की मरम्मत में छत की वाटरप्रूफिंग, फर्श की नई टाइलिंग, UPVC खिड़कियां, मॉड्यूलर किचन, दीवारों की मरम्मत और पेंटिंग शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अन्य काम भी होने हैं ताकि लंबे समय से खाली पड़े क्वार्टर को रहने योग्य बनाया जा सके.
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विवाद बढ़ा तो सरकार ने दी सफाई
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह इमारत लगभग 15 साल से खाली पड़ी थी और काफी खराब हालत में थी. इसलिए इसकी मरम्मत पर खर्च उचित है.
लेकिन राजनीतिक विवाद क्यों?
खर्च की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में बदल गया है.
राज्य सरकार ने हाल के महीनों में कई बार कहा है कि वित्तीय स्थिति खराब है और कल्याणकारी योजनाओं के लिए फंड की कमी है. लंबित बिलों का भुगतान नहीं हो पा रहा, कई विकास परियोजनाएं रुकी हैं. इसी बीच सरकारी आवासों पर खर्च बढ़ने से सवाल उठ रहे हैं.
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अन्य खर्च भी सामने आए
दो हफ्तों में मंत्रियों के आवासों पर मरम्मत और सैनिटरी कामों पर 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. इन्हीं में स्वास्थ्य मंत्री के आवास पर 30 लाख रुपये के काम भी शामिल हैं.
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों का कहना है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी खुद राज्य की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते रहे हैं, लेकिन ऐसे खर्च यह दिखाते हैं कि सरकार की प्राथमिकताएं मेल नहीं खातीं. आलोचकों का यह भी कहना है कि कर्मचारियों के बकाया और कल्याणकारी भुगतान अब भी लंबित हैं, जबकि सरकारी आवासों पर भारी खर्च किया जा रहा है.













