जब लाउडस्पीकर नहीं था तो भगवान और खुदा नहीं थे क्या? : तेजस्वी यादव

एक ट्वीट में उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लाउडस्पीकर और बुलडोजर पर चर्चा हो रही है, लेकिन महंगाई, बेरोजगारी पर कोई बातचीत नहीं हो रही.

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राजद नेता तेजस्वी यादव
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने देश में चल रहे लाउडस्पीकर विवाद पर बयान दिया है. उन्होंने पूछा है कि क्या जब लाउडस्पीकर नहीं था तो भगवान और खुदा नहीं थे? उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि लाउडस्पीकर को मुद्दा बनाने वालों से पूछता हूं कि लाउडस्पीकर की खोज साल 1925 में हुई तथा भारत के मंदिरो/मस्जिदों में इसका इस्तेमाल 70 के दशक के आसपास शुरू हुआ. जब लाउडस्पीकर नहीं था तो भगवान और ख़ुदा नहीं थे क्या? बिना लाउडस्पीकर प्रार्थना, जागृति, भजन,भक्ति व साधना नहीं होती थी क्या?'

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म और ईश्वर लाउडस्पीकर के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने लिखा है, 'असल में जो लोग धर्म और कर्म के मर्म को नहीं समझते है, वही बेवजह के मुद्दों को धार्मिक रंग देते है. आत्म जागरूक व्यक्ति कभी भी इन मुद्दों को तुल नहीं देगा. भगवान सदैव हमारे अंग-संग है. वह क्षण-क्षण और कण-कण में व्याप्त है. कोई भी धर्म और ईश्वर कहीं किसी लाउडस्पीकर के मोहताज नहीं है.'

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वहीं, एक ट्वीट में उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लाउडस्पीकर और बुलडोजर पर चर्चा हो रही है, लेकिन महंगाई, बेरोजगारी पर कोई बातचीत नहीं हो रही. उन्होंने लिखा है, 'लाउडस्पीकर और बुलडोजर पर विमर्श हो रहा है लेकिन महंगाई, बेरोजगारी, किसान और मजदूर की बात नहीं हो रही है. जनहित के असल मुद्दों को छोड़, लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, जिसे शिक्षा, चिकित्सा, नौकरी, रोजगार नहीं मिल रहा. युवाओं की जिन्दगी बर्बाद हो रही है इस पर चर्चा क्यों नहीं हो रही?'

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