जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के मुद्दे पर शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में एक बार फिर तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और वाई एस आर कांग्रेस (वाईएसआरसी) ने एक-दूसरे पर हमला बोला. वाईएसआरसी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं तेदेपा नेता एन चंद्रबाबू नायडू ने गुपचुप तरीके से यह सॉफ्टवेयर खरीदा था.
पिछले साल अगस्त में पुलिस महानिदेशक ने एक आरटीआई अर्जी के जवाब में बताया था कि इस तरह का सॉफ्टवेयर कभी नहीं खरीदा गया. हालांकि, राज्य के सत्तारूढ़ दल ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मुद्दे की विस्तृत जांच कराने की मांग की. वहीं, तेदेपा ने दोहराया कि डीजीपी रुख को पहले ही साफ कर चुके हैं.
यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि पूर्ववर्ती तेदेपा सरकार ने इजराइली कंपनी से पेगासस सॉफ्टवेयर खरीदा था. हालांकि, तेदेपा महासचिव नारा लोकेश ने बनर्जी के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को गलत जानकारी मिली है.
लोकेश ने कहा, '' हां, पेगासस ने अपना जासूसी सॉफ्टवेयर बेचने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार को पेशकश की थी, लेकिन हमने इसे खारिज कर दिया था.'' इस बीच, वाईएसआरसी के प्रवक्ता ए रामबाबू ने कहा, '' जो ममता बनर्जी ने कहा है, अगर वो सही नहीं है तो चंद्रबाबू नायडू, बनर्जी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर क्यों नहीं करते?''
उन्होंने कहा, ''अगर चंद्रबाबू ऐसा नहीं करते तो माना जाएगा कि वह पेगासस का इस्तेमाल करने को स्वीकार करते हैं. अगर राज्य और केंद्र सरकारें गहन जांच करें तो सच्चाई सामने आ जाएगी.''
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