तमिलनाडु चुनावों का विश्लेषण: राहुल कंवल के साथ समझें नंबर गेम

तमिलनाडु में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन देखा जाता रहा है. क्या एमके स्टालिन की DMK सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी, या विजय की TVK इस मुकाबले को पूरी तरह से बदल देगी?

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तमिलनाडु में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन देखने को मिलता रहा है.
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  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK DMK- AIADMK को वोट शेयर में झटका दे सकती है
  • अगर टीवीके को आठ प्रतिशत वोट मिलते हैं तो इसका नुकसान AIADMK को डीएमके की तुलना में अधिक होगा
  • दस प्रतिशत वोट मिलने पर टीवीके मुख्य रूप से AIADMK के वोट काटेगी जो डीएमके गठबंधन को फायदा पहुंचाएगा
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नई दिल्ली:

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, एक्टर विजय की नई पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) सीएम एमके स्टालिन की सत्तारूढ़ डीएमके के वोट शेयर में कितनी सेंध लगा सकती है? एनडीटीवी के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने मतगणना वाले दिन के कई संभावित सिनेरियो और क्या हो सकता है वाली स्थितियों का विश्लेषण किया. दरअसल तमिलनाडु में हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन देखा जाता रहा है. ऐसे में सवाल यही है कि क्या स्टालिन की डीएमके सत्ता बरकरार रख पाएगी, या विजय की टीवीके चुनाव का रुख पूरी तरह बदल देगी.

टीवीके को चुनाव में अगर 14 प्रतिशत वोट मिलते हैं, तो यह करारा झटका साबित हो सकता है. लेकिन किसके लिए?  ऐसे ही कई और सवाल ग्राउंड लेवल पर काम कर रहे विशेषज्ञों और संपादकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं. सभी ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या होगा.

क्या DMK और AIADMK दोनों को झटका?

एक सिमुलेशन में, टीवीके को 8 प्रतिशत वोट मिले. इसे DMK और AIADMK दोनों को झटका लगेगा. इस वोट शेयर का 2 प्रतिशत डीएमके से और 4 प्रतिशत एआईएडीएमके के खाते से आया है. इसलिए पहले सिमुलेशन में ऐसा लग रहा है कि विजय की टीवीके AIADMK को सत्ता धारी दल की तुलना में ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. 

अगर ऐसा हुआ तो DMK गठबंधन में 173 सीटें जीत सकती है, जबकि AIADMK करीब 61 सीटों पर सिमट जाएगी. एक्टर विजय की पार्टी को लेकर बड़ा सवाल यह है कि उन्हें किससे ज्यादा वोट मिल रहे हैं? अगर उन्हें DMK से मिलने वाले वोटों से दोगुने वोट AIADMK से मिल रहे हैं, तो DMK की बढ़त बढ़ जाएगी और AIADMK गठबंधन सिकुड़ जाएगा यह विपक्षी दल के लिए बुरी स्थिति होगी.

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विजय DMK को पहुंचा रहे ज्यादा नुकसान?

अगले सिमुलेशन में, इसका उल्टा देखने को मिला है. जिसके मुताबिक, 4 प्रतिशत वोट DMK को और 2 प्रतिशत वोट AIADMK को मिल रहे हैं. इस तरह से विजय DMK को AIADMK की तुलना में दोगुना नुकसान पहुंचा रहे हैं. ऐसे में अगर विजय को सिर्फ 8 प्रतिशत वोट मिलते हैं, तो DMK गठबंधन को 234 में से 142 सीटें मिलेंगी, जबकि AIADMK को 92 सीटें मिलेंगी.

पहले सिनेरियो में विजय की TVK को 8 प्रतिशत वोट मिलना वास्तव में DMK के लिए फायदे की बात है, भले ही उन्हें इस वोट का बड़ा हिस्सा DMK से ही क्यों न मिला हो. अगर विजय को 10 प्रतिशत वोट मिलते हैं, जिसमें लगभग दोगुना हिस्सा AIADMK से, 2.4 प्रतिशत DMK से और 2 प्रतिशत अन्य पार्टियों से आता है, तो DMK मुख्य लाभार्थी के रूप में उभरती है और 176 सीटें जीत सकती है. जबकि AIADMK की सीटें घटकर 58 रह जाएंगी, क्योंकि अधिकांश वोट उसी के हिस्से से विजय की पार्टी को मिल रहे हैं. 

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हालांकि, इन सिनोरियो में विजय अकेले या गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति नहीं दिख रहे. अगर वोट शेयर 10 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाता है, तो भी ज्यादातर वोट AIADMK से ही आएंगे. जिसका मतलब है कि DMK को और भी बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा क्योंकि उसे ज्यादा वोट मिलेंगे. लेकिन DMK के लिए सबसे बुरा सिनेरियो तब होगा जब विजय को अपने 12 प्रतिशत वोट शेयर में से 8 प्रतिशत DMK से और 2 प्रतिशत AIADMK से मिलेंगे. इसके तहत  AIADMK को 127 और DMK को 107 सीटें मिलेंगी.

विजय की बदौलत AIADMK को बढ़त मिलती दिख रही

आखिर में, एक सिमुलेशन में, अगर विजय को 14 प्रतिशत वोट शेयर मिलता है और 8.4 प्रतिशत वोट AIADMK से आते हैं, तो सत्ताधारी DMK को क्लीन स्वीप मिलेगा. यहां, AIADMK की सीटें घटकर 51 रह जाएंगी. अगर स्थिति उलट होती है, यानी अगर 14 प्रतिशत में से 8.4 प्रतिशत वोट डीएमके को मिलते हैं, तो AIADMK को डीएमके की 119 सीटों के मुकाबले लगभग 115 सीटें मिलेंगी, जिससे मुकाबला बहुत करीबी हो जाएगा.

कुछ अहम सवालों का जवाब अभी भी मिलना बाकी है. सवाल ये हैं कि विजय का क्या होगा; उनका भविष्य क्या होगा; क्या वे अप्रासंगिक हो जाएंगे; क्या वे निर्णायक साबित होंगे या फिर निर्णायक रूप से चुनाव हारेंगे? उनसे सबसे ज्यादा नुकसान किसको होगा?

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तमिलनाडु में 23 अप्रैल को चुनाव

बता दें कि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग होगी. वोटों की गिनती 4 मई को होगी. चुनाव में मुख्य दावेदार डीएमके के नेतृत्व वाला धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) और AIADMK के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) हैं, जिसमें BJP और पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) सहयोगी हैं. एसपीए के सदस्यों में कांग्रेस, देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कज़गम (डीएमडीके) और विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) शामिल हैं.

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