- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में पचास प्रतिशत वृद्धि की जाएगी.
- तमिलनाडु की लोकसभा सीटें बढ़कर उन सदस्यों का सात दशमलव दो प्रतिशत ही रहेंगी, जो वर्तमान में निर्धारित है.
- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए वर्टिकल आरक्षण जारी रहेगा, और सीटों में पचास प्रतिशत वृद्धि होगी.
सरकारी सूत्रों के अनुसार महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष भ्रम फैला रहा है. सूत्रों का कहना है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जबकि राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व का अनुपात मौजूदा स्तर पर ही बना रहेगा. फिलहाल तमिलनाडु का लोकसभा में 7.2 प्रतिशत प्रतिनिधित्व है. आगे भी यह अनुपात समान रहेगा. अभी तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटें हैं, जो 543 सदस्यों वाली लोकसभा का 7.2 प्रतिशत है. सीटें बढ़ने के बाद यह संख्या 59 हो जाएगी, जो प्रस्तावित 816 सदस्यों वाली लोकसभा का भी 7.2 प्रतिशत ही होगी. यानी तमिलनाडु हो या कोई अन्य राज्य, सभी राज्यों का अनुपात वर्तमान स्तर पर ही रहेगा.
सूत्रों के अनुसार, डीएमके गलत प्रचार कर रही है, जिससे उसकी साख को नुकसान पहुंचेगा. तीनों कानूनों को एक साथ पढ़ने पर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं रहता. प्रधानमंत्री ने आज स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इसकी गारंटी दे रहे हैं. राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या भी 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी. इस पूरे मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह कल विस्तार से जवाब देंगे.
एससी-एसटी वर्ग के लिए वर्टिकल आरक्षण लागू रहेगा. यानी फिलहाल जितनी सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं, उनमें भी 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और बढ़ी हुई सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी. सूत्रों ने स्पष्ट किया कि संविधान में ओबीसी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए अलग से ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं दिया जा सकता. परिसीमन विधेयक में साफ लिखा है कि सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जो 2011 की जनगणना के आधार पर होगा.
सूत्रों के अनुसार, कुल सात संवैधानिक अनुच्छेदों में संशोधन किए जा रहे हैं- अनुच्छेद 55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334(a). ये संशोधन तीन विधेयकों के माध्यम से किए गए हैं. सूत्रों ने यह भी बताया कि यह आरोप पूरी तरह गलत है कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व कम होगा. लोकसभा के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी. यह प्रक्रिया भी 2011 की जनगणना के आधार पर होगी और सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी. वर्तमान में देश भर में विधानसभाओं की कुल 4,123 सीटें हैं, जो बढ़कर 6,186 हो जाएंगी.
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