16 दिन, जयपुर का शिल्पकार और चांदी की चमक...T20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी की दिलचस्प कहानी

टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी की अनोखी कहानी कांच से शुरू होकर भारतीय परंपरा की चांदी पर खत्म हुई। जयपुर के शिल्पकार अमित पाबूवाल ने इसे तैयार किया और दावा किया कि भारत इस ट्रॉफी को फिर उठाएगा.

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टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल आज
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  • जयपुर के 64 वर्षीय शिल्पकार अमित पाबूवाल ने मात्र सोलह दिनों में टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी का निर्माण किया था
  • अमित ने 1987 में मुंबई में बीकॉम करते हुए भारत में वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाने का सपना देखा और उसे पूरा किया
  • 2007 के टी20 वर्ल्ड कप के लिए चांदी और प्लेटिनम से बनी ट्रॉफी का डिजाइन और मजबूती आईसीसी को पसंद आई थी
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जब पूरी दुनिया इस बात पर नज़रें टिकाए है कि टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी किस देश के हाथ लगेगी, तब राजस्थान के जयपुर के 64 वर्षीय शिल्पकार अमित पाबूवाल के बारे में कम ही लोग जानते हैं, जिन्होंने महज 16 दिनों में यह ट्रॉफी तैयार की. एक नौजवान लड़का जो 1987 में मुंबई में बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था. इसी दौरान भारत में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए ट्रॉफी बनाने का सपना देखा. अपने पिता को इस सपने के बारे में बताया. पिता को शुरू में थोड़ा समझाना पड़ा. इसके बाद उन्होंने आयोजकों से संपर्क किया, इसके बाद ट्रॉफी बनाई. इसके बाद उस नौजवान लड़के ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. एक के बाद एक कई इंटरनेशनल रिकॉर्ड बनाए.

अमित ने बताई ट्रॉफी बनाने की कहानी

अमित बताते हैं कि हमारा परिवार हैंडीक्राफ्ट के बिजनेस से जुड़ा था. मैं कुछ अलग और खास बनना चाहता था. वर्ल्ड कप के लिए ट्रॉफी बनाने का ख्याल 1987 में आया, जब मैं मुंबई के सायडेनहाम कॉलेज से बी.कॉम कर रहा था. मैंने तुरंत अपने पिता को बताया, उस वक्त हमारा कारोबार कुछ और था लेकिन पिता जी ने मेरा साथ दिया. मैं आयोजकों से मिलने लगा और आखिरकार रिलायंस वर्ल्ड कप 1987 ट्रॉफी बनाने का चयन हुआ, जो भारत में हुआ था, हालांकि वह ऑस्ट्रेलिया ने जीता था.

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2007 की ट्रॉफी बनाने की कहानी कितनी दिलचस्प

इसके बाद 2007 में टी20 वर्ल्ड कप के लिए ट्रॉफी बनाने का अवसर मिला, यह कहानी बड़ी दिलचस्प रही. सबसे पहले आईसीसी ट्रॉफी को टाइटेनियम और कांच से बनाना चाहती थी, यह चुनौतीपूर्ण था. कांच के छोटे टुकड़ों को जोड़कर एक ड्यूरेबल ट्रॉफी बनाना मुश्किल था. मैने प्रयास किया लेकिन वह नहीं बन पाई. इसके बाद स्वारोवस्की क्रिस्टल कंपनी को ट्रॉफी बनाने के लिए संपर्क किया गया. उन्होंने दावा किया वो ऐसा कर देंगे, लेकिन सफल नहीं हुए. इसके बाद मैंने चांदी की धातु का इस्तेमाल कर ट्रॉफी बनाने का प्रस्ताव रखा. इस ट्रॉफी की डिजाइन और इसकी ड्यूरेबिलिटी से आईसीसी ने इसे पसंद किया, तब से यह ट्रॉफी इस फॉर्मेट की पहचान है.

क्यों चांदी से बनाई गई ट्रॉफी

अमित बताते हैं कि चांदी का प्रयोग इसलिए किया क्योंकि चांदी एक कीमती धातु है. साथ ही, चांदी को कैसे भी आसानी से ढाला जा सकता है. वहीं, चांदी एक भारतीय संस्कृति की पहचान भी देती है. फाइनल मैच के बाद विजेता टीम को सौंपी जाने वाली वर्तमान ट्रॉफी 21 इंच ऊंची है, इसका वजन 6 किलो है, यह चांदी और प्लेटिनम के साथ बनाई गई है. उन्होंने बताया कि यह ट्रॉफी अन्य ट्रॉफियों से अलग है क्योंकि इसका डायनामिक डिज़ाइन खेल के तेज गति और आधुनिक फॉर्मेट को दर्शाता है, यही वजह है कि डिज़ाइन अनोखा और अलग है.

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टी20 वर्ल्डकप की ट्रॉफी में क्या खास

बाद के वर्षों में अमित पाबूवाल ने ट्रॉफी डिज़ाइन और शिल्पकला में भारत को वैश्विक नक्शे पर प्रमुखता से स्थापित किया. उनकी रचनाओं में दुनिया की सबसे बड़ी चांदी की ट्रॉफी शामिल है, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड वाली पहली चांदी ट्रॉफी बनी. दुनिया की सबसे महंगी ट्रॉफी समेत कई कलाकृतियां उन्होंने बनाई है. अमित का मानना है कि आज भारत जीतेगा, उन्होंने कहा कि 2007 में आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप से पहले मैंने आश्वासन दिया था कि भारत जीतेगा. वह भविष्यवाणी क्रिकेट इतिहास का हिस्सा बनी जब भारत ने पहला टी20 वर्ल्ड कप जीता, इस बार भी ऐसा ही होगा. मुझे पूरा यकीन है कि भारत जीतेगा और मेरी बनी ट्रॉफी को ऊपर उठाएगा.

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