- प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य होने का दावा करने पर नोटिस जारी किया है
- नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन ज्योतिषपीठ शंकराचार्य मामलों का हवाला देते हुए जवाब मांगा गया है
- मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आधार पर कहा, किसी को ज्योतिषपीठ शंकराचार्य के पद पर नियुक्त नहीं किया गया
Swami Avimukteshwaranand: मौनी अमावस्या पर स्नान न करने के बाद धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस भेजा है. इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का हवाला देते हुए प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा है कि वो कैसे खुद को शंकराचार्य बता रहे हैं. प्राधिकरण ने इसको लेकर अविमुक्तेश्वरानंद से जवाब मांगा है. 24 घंटे में मेला प्राधिकरण ने अवमुक्तेश्वरानंद से जवाब मांगा है. मौनी अमावस्या पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर कहा है कि मेला प्रशासन ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि वो ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य नहीं हैं. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकाराचार्य मानने से इनकार किया है.
प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है. पिछले 36 घंटे से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिविर के बाहर पालकी पर बैठे हुए हैं. इस बीच देर रात प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर दिया है. नोटिस जारी कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से 24 घंटे में जवाब मांगा गया है. पत्र में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र किया गया है. नोटिस प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है.
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सुप्रीम कोर्ट के प्रार्थना पत्र के उपरोक्त खंड को पूर्णतया स्वीकार करते हुए 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया गया था. नोटिस में कहा गया है कि इस अपील संख्या ताजा स्थिति के रूप में कोई अन्य आदेश पारित नहीं हुआ है. ये मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से अपील का निस्तारण नहीं कर दिया जाता या कोई अग्रिम आदेश पट्टाभिषेक के मामले में पारित नहीं होता, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के तौर पर सुशोभित नहीं हो सकता.
अभी के आदेश से यह स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है. इसके बावजूद माघ मेला प्रयागराज 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित कर रहे हैं. ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है.
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उम्मीद की जाती है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का परिपालन किए जाने के साथ ही इस पत्र के प्राप्ति के 24 घण्टे के अंदर यह भी स्पष्ट करें कि आप द्वारा अपने नाम के साथ शंकराचार्य शब्द का प्रयोग अथवा स्वयं को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के तौर पर प्रचारित या प्रसारित कैसे किया जा रहा है? नोटिस में अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में लगाए गए बोर्ड के फोटो भी अटैच किए गए हैं.













