- मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच स्नान को लेकर विवाद हुआ.
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी को राम मंदिर में प्रवेश न देने पर टिप्पणी की थी.
- एक समय तो उन्होंने केदारनाथ मंदिर से सोने के गायब होने का आरोप लगाया गया.
प्रयागराज में बीते दिनों मौनी अमावस्या के मौके पर स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन आमने-सामने थे. मेला और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रदर्शन भी किया. आपको बता दें कि मौनी अमावस्या के दौरान मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए जाने से रोक दिया था. इसके बाद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई थी. इससे नाराज होकर शंकराचार्य ने धरना शुरू कर दिया. ये कोई पहला मौका नहीं है जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुर्खियों में बने हुए हैं. इससे पहले अपने विवादित बयानों को लेकर भी वो कई बार चर्चाओं में रहे हैं. आज हम आपको उनके तमाम बयानों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें लेकर एक समय बवाल मचा था.
राहुल गांधी को मंदिर में प्रवेश नहीं करने देना चाहिए
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राहुल गांधी 'हिंदू' नहीं हैं और इसलिए उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने देना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील करता हूं कि राहुल गांधी को राम मंदिर में प्रवेश न करने दें. जो व्यक्ति हिंदुओं को गाली देता है, वह वहां जाने के लायक नहीं है.
सिंधु जल समझौते को रोकने पर सरकार को घेरा
सरकार ने बोला था कि सिंधु जल रोक दिया जाएगा पाकिस्तान के लिए. जब हमने भारत सरकार की जल रोकने की व्यवस्था के बारे में पता किया. तो पता चला कि सरकार के पास कोई व्यवस्था ही नहीं है. अगर सरकार इसको रोकने की तैयारी करें तो कम से कम 20 साल लगेगा और पैसा कितना लगेगा, उसकी कोई बात ही नहीं है. संधि को खत्म करके जनता को मूर्ख नहीं बना सकते. सबसे पहले आतंकी हमले के जिम्मेदार की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. इसके बाद सीमापार बैठे आकाओं को सबक सिखाने के लिए सरकार युद्ध की तैयारी करे.देश की जनता सरकार के साथ है. वक्फ बिल पर मोदी सरकार पर आरोप
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को लेकर बयान
19 Sept 2024 को शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भी विवादास्पद टिप्पणी की. उनका कहना था कि जो लोग अंग्रेजी तारीखों पर अपना जन्मदिन मनाते हैं, वे हिंदू नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की जन्म तिथियाँ अंग्रेजी कैलेंडर से नहीं होतीं, और ऐसे लोग भारतीय संस्कृति से विमुख होते हैं. उनका यह बयान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से एक कड़ा बयान था, जो आलोचनाओं का केंद्र बना.
पीएम मोदी गौ हत्या पर क्यों नहीं लगा रहे रोक?
गौ हत्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि हमे भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक ही सवाल पूछना है, "तुम हिन्दू हो..तुम्हारे पास ताकत है और तुम गद्दी पर बैठे हो. तुमने हिन्दुओं के वोट लिए हैं. तुम गाय के बछड़े को दुलारते हुए दिखाई भी दे रहे हो. बावजूद इसके क्या कारण है कि पीएम गौ हत्या को बंद नहीं करा रहे हैं. क्या दबाव है इसको सार्वजनिक करो. या फिर हिन्दू-हिन्दू वाला नाटक छोड़ो."
केदारनाथ मंदिर से सोना गायब होने का लगाया आरोप
15 जुलाई 2024, को अविमुक्तेश्वरानंद ने केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब होने का आरोप लगाया था. तब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् और निरंजनी अखाड़ा के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने इस मामले पर जवाब दिया था. उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के पास अगर सोना चोरी का सबूत है तो उन्हें पुलिस या कोर्ट को सौंपे. उन्होंने कहा था कि अगर उनके पास प्रमाण नहीं है तो सुर्खियों में बने रहने के लिए अनर्गल बयानबाजी न करें.
काशी कॉरिडोर को लेकर खड़े किये थे सवाल
जब उन्होंने काशी में मंदिर तोड़े, सिर्फ मंदिर ही नहीं दो-दो हजार साल, 1500 साल, हजार साल पुरानी मूर्तियों को तोड़कर जब उन्हें मलबे में फेंका तो हमसे नहीं देखा गया. हमने विरोध किया और आज भी करते हैं और जब तक जीवित रहेंगे तब तक करते रहेंगे. उस कार्य के लिए हम उनको गलत कहते रहेंगे. आपको बहुत अच्छा बनाने के लिए 50 की हत्या कर दें. एक मूर्ति की पूजा करने के लिए 10 मूर्तियों को तोड़ दें क्या? एक मूर्ति का महत्व बढ़ाने के लिए 10 मूर्तियों को तोड़कर कहें कि हमने अच्छा काम किया, ये हम स्वीकार नहीं करते हैं. वो दृश्य हमने अपनी आंखों से देखे हैं कि हमारे देवताओं की मूर्तियां पड़ी हैं. चारों तरफ छिटक रहीं हैं.”
उद्धव ठाकरे पर बयान
जुलाई, 2024 को शंकराचार्य ने कहा था,''हम हिंदू धर्म को मानते हैं.हम पुण्य और पाप में विश्वास करते हैं.विश्वासघात को सबसे बड़ा पाप कहा जाता है, यही उद्धव ठाकरे के साथ हुआ है.उन्होंने मुझे बुलाया था.मैं यहां (मातोश्री) आया. उन्होंने स्वागत किया. हमने कहा कि उनके साथ हुए विश्वासघात से हमें दुख है. जब तक वे दोबारा सीएम नहीं बन जाते, हमारा दुख दूर नहीं होगा.''
प्रयागराज में महाकुंभ की भगदड़ पर योगी को घेरा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वंय बयान दिया कि भगदड़ में कुछ लोग घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है और उन्होंने किसी के मौत की जानकारी नहीं दी. उनके इस बयान के बाद द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के महारज जी से अनुरोध किया कि अब चल कर स्नान किया और फिर हम लोगों ने स्नान किया. उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने हमारे साथ धोखा किया? पहले अखाड़ों ने स्नान रद्द कर दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री के वक्तव्य का प्रभाव रहा, जिसमें उन्होंने का कि सब कुछ ठीक है तो सारे अखाड़ों के साथ संत महंतों ने स्नान किया.स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भावुक स्वर में कहा कि मौत की खबर के बाद क्या हम लोग एक दिन उपवास नहीं रख सकते थे, उनके लिए जो चले गए. उन्होंने कहा कि आपने (मुख्यमंत्री) ने हमको ऐसा आभास करा दिया कि अफवाह चल रही है, कोई मौत नहीं हुई है. यह बहुत बड़ा धोखा है, संत, सनातनियों और हम लोगों के साथ धोखा है. देश के सामने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला, झूठा मुख्यमंत्री.
रामभद्राचार्य को दिया खुला चैलेंज
रामभद्राचार्य पर निशाना साधते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आप कहते हो कि मैंने शास्त्र पढ़ लिए, लेकिन शास्त्रों में लिखा है कि जो भी विकलांग होता है उसको संन्यास का अधिकार नहीं है, उसके बाद भी आप दंड लेकर लोगों के सामने संन्यासी बने घूम रहे हो. शास्त्रों के विरोध में आप कैसे संन्यासी बनकर घूम रहे हो.आप तुलसी दास जी का विरोध करते हो, रामानंदाचार्य जी का विरोध करते हो. आदि शंकराचार्य और चारों पीठों के शंकराचार्य के खिलाफ टिप्पणी करते हो, आप उपनिषद के भी विरोधी हो.
रामभद्राचार्य पर राजनीति करने का आरोप
जगद्गुरु शंकराचार्य ने रामभद्राचार्य पर राजनीति करने का आरोप लगाया.उन्होंने कहा कि ये व्यक्ति केवल राजनीतिक सांठगांठ से बड़े-बड़े पुरस्कार लेकर अपने ही मुंह से अपनी प्रशंसा करता है. उन्होंने तुलसीदास जी का उदाहरण देते हुए कहा कि इतने बड़े ज्ञानी होने के बाद भी उन्होंने खुद कभी अपनी तारीफ नहीं की, जो कायर होता है वही अपनी प्रशंसा करता है.
कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
आपको बता दें कि मौजूदा समय में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं.इनका का जन्म 5 अगस्त, 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था.उनका मूल नाम उमाशंकर उपाध्याय है. उन्होंने वाराणसी के मशहूर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की है.पढ़ाई के दौरान वो छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे.वे 1994 में छात्रसंघ का चुनाव भी जीते थे.उमाशंकर उपाध्याय की प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही हुई. बाद में वे गुजरात चले गए.इस दौरान वो धर्म और राजनीति में समान दखल रखने वाले स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी राम चैतन्य के संपर्क में आए.उनके कहने पर ही उमाशंकर उपाध्याय ने संस्कृत की पढ़ाई शुरू की.करपात्री जी के बीमार होने पर वे आ गए और उनके निधन तक उनकी सेवा की.इसी दौरान वे ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के संपर्क में आए. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें 15 अप्रैल 2003 को दंड सन्यास की दीक्षा दी गई. इसके बाद उन्हें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती नाम मिला.
कब बने शंकराचार्य
संस्कृत व्याकरण, वेद, पुराण, उपनिषद, वेदांत, आयुर्वेद और शास्त्रों की गहन शिक्षा के बाद 1990 के दशक में उन्होंने संन्यास लिया. स्वामी करपात्री जी के अस्वस्थ होने पर वे उनकी सेवा में जुट गए और अंतिम समय तक उनके साथ रहेइसी दौरान उनका संपर्क ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से हुआ. 15 अप्रैल 2003 को उन्हें दंड संन्यास की दीक्षा दी गई और तभी उन्हें नाम मिला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती. सितंबर 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) का शंकराचार्य नियुक्त किया गया.हालांकि इस पद को लेकर तब से ही कुछ विवाद और कानूनी पेच सामने आते रहे हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में है.
कोर्ट ने क्या कहा
यह मामला 2020 से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. अक्टूबर 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी. जस्टिस बी.आर. गवई और बी.वी. नागरत्ना की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि पुरी के गोवर्धन मठ के शंकराचार्य ने एक हलफनामा दायर किया है जिसमें कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में नियुक्त करने का समर्थन नहीं किया गया है. (इनपुट - अमोद प्रकाश सिंह की है)
केस नंबर
सी.ए. नंबर 003010 / 2020, 27-08-2020 को रजिस्टर्ड
एसएलपी(सी) नंबर 034253 - / 2017, 08-12-2017 को रजिस्टर्ड
शंकराचार्य बने रहने पर कब कब सवाल उठे
- सितंबर 2022 से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बनाए जाने को लेकर विवाद रहा है
- उसी समय संन्यासी अखाड़े ने उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया था
- उस समय निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति नियमों के खिलाफ है
- उनका कहना था कि शंकराचार्य की नियुक्ति की एक प्रक्रिया होती है जिसका पालन नहीं किया गया
यह भी पढ़ें: '...तो हम AIMIM के साथ हैं', शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बिहार चुनाव पर बड़ा बयान













