- ईरान और इजरायल के बीच सैन्य तनाव के कारण भारतीय टेक्सटाइल और डायमंड उद्योगों का निर्यात प्रभावित हो रहा है
- सूरत से खाड़ी देशों में कपड़ा निर्यात में देरी से 5-7 हजार करोड़ रुपये के लेन-देन पर असर पड़ने का अनुमान
- युद्ध से कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से यार्न और फाइबर महंगे होंगे, जिससे उत्पादन लागत और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का प्रभाव अब सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचने लगा है. टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री, जिन्हें देश की आर्थिक तरक्की की रीढ़ माना जाता है. वो सेक्टर भी इस अस्थिर माहौल में गंभीर चिंता का सामना कर रहा है. हाल ही में निर्यात में सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक हालात ने इस सकारात्मक माहौल को अनिश्चितता में बदल दिया है. आंकड़े बताते हैं कि स्थिति उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
टेक्सटाइल सेक्टर पर दोहरी मार
टेक्सटाइल व्यापारी रंगनाथ शारदा के अनुसार, सूरत से सबसे अधिक निर्यात खाड़ी देशों में ही होता है और दुबई के जरिए 45 से ज्यादा देशों में कपड़ा भेजा जाता है. रमजान के दौरान बड़ी मात्रा में माल शिप किया गया था, लेकिन ईरान-इजरायल की मौजूदा जंग की वजह से चलते कार्गो और शिपमेंट में देरी से करोड़ों रुपये का माल बीच रास्ते में अटका हुआ है. सूरत से कुल कपड़ा निर्यात का करीब 20–30% हिस्सा विदेशों में जाता है, जिसकी सालाना वैल्यू 25 से 30 हजार करोड़ रुपये तक होती है. व्यापारियों का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियों में ही 5 से 7 हजार करोड़ रुपये के लेन-देन पर असर पड़ सकता है.
बढ़ते संघर्ष ने क्यों बढ़ा दी सिरदर्दी
सूरत देश के मैन-मेड फाइबर उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा तैयार करता है. युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे यार्न और फाइबर महंगे होंगे. इसका सीधा असर उत्पादन लागत और ट्रांसपोर्टेशन खर्च पर पड़ेगा, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी. व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात और ज्यादा समय तक खराब रहे तो वर्कफोर्स कम करने की नौबत भी आ सकती है. फिलहाल होली के कारण लगभग 25 फीसद मजदूर अपने गांव गए हुए हैं, जिससे दबाव थोड़ा कम है. लेकिन अगर बाजार में मंदी गहराई तो लौटने वाले श्रमिकों के लिए रोजगार चुनौती बन सकता है.
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डायमंड और जेम्स-एंड-ज्वेलरी सेक्टर में बढ़ती बेचैनी
इंडियन डायमंड इंस्टीट्यूट के चेयरमैन दिनेश नावड़िया के अनुसार, युद्ध का सीधा असर जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर हुआ है. सूरत दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड पॉलिशिंग हब भी है और यहां से होने वाले कुल निर्यात का लगभग 65% हिस्सा दुबई के रास्ते अन्य देशों में जाता है. अभी की हालत ये है कि कई कंसाइनमेंट्स दुबई कार्गो में फंसे हुए हैं. दुबई से जुड़े कारोबारी भी असमंजस में हैं और सामान्य स्थिति का इंतजार कर रहे हैं.
इजरायल के साथ व्यापार के आंकड़े
- आयात 2024-25: लगभग 256.27 मिलियन डॉलर
- अप्रैल 2025 – फरवरी 2026: 337 मिलियन डॉलर से अधिक
- निर्यात 2024-25: लगभग 548 मिलियन डॉलर
- अप्रैल 2025 – फरवरी 2026: करीब 514 मिलियन डॉलर
दुबई के साथ व्यापार के आंकड़े
- आयात 2024-25: 11,000 मिलियन डॉलर से अधिक
- अप्रैल 2025 – फरवरी 2026: करीब 9,000 मिलियन डॉलर
- निर्यात 2024-25: लगभग 7,800 मिलियन डॉलर
- अप्रैल 2025 – फरवरी 2026: करीब 7,600 मिलियन डॉलर
ये सभी आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्षों में व्यापार में लगातार ग्रोथ थी, लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस तेजी पर ब्रेक लगाने का खतरा खड़ा कर दिया है.
उद्योग जगत में बढ़ती चिंता और अनिश्चितता
पिछले तीन वर्षों में उद्योग पहले ही कोविड, टैरिफ बदलाव और मांग में कमी जैसी चुनौतियों से जूझ चुका है. अब युद्ध जैसे बाहरी कारक ने नई अनिश्चितता पैदा कर दी है. टेक्सटाइल और डायमंड सेक्टर से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के निर्यात दांव पर हैं. इन उद्योगों पर निर्भर लाखों मजदूर और रत्न कलाकारों की रोज़ी-रोटी इन अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स पर टिकी है. अगर यह वैश्विक तनाव जल्द ही खत्म नहीं हुआ तो सूरत के टेक्सटाइल और डायमंड उद्योग को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है. फिलहाल पूरा उद्योग जगत स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है, ताकि शांति लौटते ही व्यापार फिर से अपनी सामान्य रफ्तार पकड़ सके.














