सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को निर्देश दिया कि बिल्डर-बैंक धोखाधड़ी से प्रभावित होमबायर्स से जुड़े दावे और शिकायतें सीधे अदालत में दाखिल करने की बजाय पहले एमिकस क्यूरी के समक्ष पेश की जाएं. अदालत ने कहा कि एमिकस क्यूरी इन दावों की जांच कर उपयुक्त सामग्री अदालत के समक्ष रखेंगे. साथ ही अदालत ने दोहराया कि सीबीआई को इस मामले की जांच तेजी से करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जांच में अनावश्यक देरी से उन हजारों होमबायर्स की परेशानी बढ़ेगी जो लंबे समय से एक घर या रिफंड का इंतजार कर रहे हैं.
आपको बता दें कि CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों की कथित मिलीभगत से होमबायर्स के धन के दुरुपयोग के आरोपों से संबंधित मामले पर सुनवाई कर रही थी.इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है.पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रभावित पक्ष(होमबायर्स, बैंक और बिल्डर)अपने दावे, सुझाव और सिफारिशें एमिकस क्यूरी राजीव जैन को सौंप सकते हैं.
अदालत ने कहा कि एमिकस क्यूरी इन पर विचार कर आवश्यक होने पर ही उन्हें अदालत के समक्ष रखेंगे .सुनवाई के दौरान कुछ पक्षों ने जांच से जुड़े दस्तावेज और रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की . जिस पर पीठ ने कहा कि ऐसी जानकारी साझा की जाए या नहीं, इसका निर्णय एमिकस क्यूरी इस आधार पर करेंगे कि इससे चल रही जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि सीबीआई को इस मामले की जांच तेजी से पूरी करनी चाहिए.
पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह एमिकस क्यूरी द्वारा गत वर्ष 29 अप्रैल को प्रस्तुत रिपोर्ट का सावधानीपूर्वक अध्ययन करे और उसमें चिन्हित जांच के पहलुओं पर ध्यान दे. साथ ही अदालत ने सीबीआई के एक जिम्मेदार अधिकारी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जिसमें बताया जाए कि चार्जशीट दाखिल करते समय इन पहलुओं पर विचार किया गया है या नहीं और वर्तमान जांच में उन्हें किस प्रकार लागू किया जा रहा है. अदालत ने जांच पूरी करने की संभावित समयसीमा भी बताने को कहा है.
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