- सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया
- याचिका में खेती की पूरी असली लागत को MSP में शामिल करने और पूरी फसल की खरीद की मांग की गई है
- याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि MSP लागत से कम है और इसे लागत से 50% अधिक होना चाहिए
किसानों की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब है. याचिका में मांग की गई है कि सरकार जब न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करे, तो वह खेती की पूरी असली लागत को ध्यान में रखे, जो किसान अपनी फसल MSP पर बेचना चाहते हैं, सरकार उनकी पूरी फसल खरीदे. इसके साथ ही हर गांव, ब्लॉक, तहसील और जिले में पर्याप्त सरकारी खरीद केंद्र बनाए जाएं. किसानों की आर्थिक परेशानी को देखते हुए किसानों का कृषि कर्ज माफ किया जाए.
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह याचिका देश के किसानों से जुड़े एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है. याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे खेती की वास्तविक लागत के आधार पर तय एमएसपी के तहत अधिसूचित सभी फसलों की पूरी खरीद सुनिश्चित करें. याचिका में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि जो किसान अपनी फसल एमएसपी पर बेचना चाहते हैं, उनकी फसलों की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं.
MSP पर सिर्फ़ गेहूं और अनाज खरीदा जा रहा
याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हर साल 10,000 से ज़्यादा किसान सुसाइड करते हैं. MSP कॉस्ट प्राइस से कम दिया जाता है. यह कॉस्ट प्राइस प्लस 50 परसेंट होना चाहिए. MSP पर सिर्फ़ गेहूं और अनाज खरीदा जाता है, जबकि अन्य फैसलों पर 2 या तीन फीसदी ही MSP मिलता है. इससे किसान बहुत परेशान हैं, क्यों उन पर यह दोहरी मार है.
छोटे और बड़े किसानों के लिए एक जैसी पॉलिसी नहीं हो सकती...
CJI सूर्यकांत ने कहा, "बहुत सारे मैथमेटिकल फ़ॉर्मूले बताए जा रहे हैं. ज़मीन और कैपिटल की कॉस्ट में मुश्किल आएगी. क्या यह हर राज्य या ज़िले में अलग-अलग नहीं होगा? इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार का फ्री राशन देना ठीक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसान पर ऐसा असर पड़े कि उन्हें कॉस्ट न मिले और वे सुसाइड कर लें. पूरे देश की वेटेड एवरेज कॉस्ट लें और उतना भुगतान करें. हालांकि, CJI ने कहा कि यहां बड़ी ज़मीन वाले किसान हैं, सभी के लिए एक जैसी पॉलिसी नहीं हो सकती.














