- SC ने अरुणाचल CM पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने मामले में CBI जांच के आदेश दिए
- याचिका में आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में खांडू के परिवार की कंपनियों को 380 करोड़ के 146 ठेके बिना टेंडर दिये
- मामला 1270 करोड़ से ज्यादा के ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार के संकेत मिले हैं
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की CBI प्रारंभिक जांच होगी, सुप्रीम कोर्ट ने इसके आदेश दे दिये हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दो हफ्ते में CBI प्रारंभिक जांच पंजीकृत करे. सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के मामले में सीबीआई या SIT जांच की मांग वाली याचिका पर 17 फरवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
1270 करोड़ से के ठेकों पर विवाद
अरुणाचल प्रदेश का यह मामला 1,270 करोड़ रुपये से अधिक के ठेकों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जो खांडू के रिश्तेदारों को दिए गए थे. जनहित याचिका (PIL) में आरोप है कि पिछले एक दशक में, पेमा खांडू के परिवार (पत्नी त्सेरिंग डोल्मा, बेटे ताशी खांडू आदि) से संबंधित 4 कंपनियों को 380 करोड़ रुपये से अधिक के 146 ठेके (कुछ रिपोर्टों के अनुसार 1,270 करोड़) दिए गए, जो भ्रष्टाचार का संकेत है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती. राज्य सरकार ने बिना टेंडर के ठेके देने का बचाव करते हुए कहा है कि यह विकास के लिए आम बात है. जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने मामले को गंभीरता से लेते हुए, 2015 से 2025 तक के सभी ठेकों का विवरण मांगा था.
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CBI एक प्रारंभिक जांच दर्ज करेगी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, CBI एक प्रारंभिक जांच दर्ज करेगी. इसमें नवंबर 2015 से 2025 तक के अवार्ड और उनके क्रियान्वयन को शामिल किया जाएगा. इस निर्धारित अवधि के बाहर के अवार्ड की जांच करने पर कोई रोक नहीं होगी. राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर इस आदेश का पालन करेगी. मुख्य सचिव CBI के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि CBI के साथ रिकॉर्ड साझा करने का कार्य समय पर पूरा हो. CBI 16 सप्ताह के भीतर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि क्या एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है.
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