तेलंगाना में राजनेताओं और हाईकोर्ट जजों की फोन टैपिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी प्रभाकर राव को भारत आने के लिए पासपोर्ट लौटाने का निर्देश दिया. अगले आदेशों तक गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई है.

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तेलंगाना में राजनेताओं और हाईकोर्ट जजों के फोन टैपिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो प्रमुख टी प्रभाकर राव को भारत आने के लिए पासपोर्ट लौटाने का निर्देश दिया. अगले आदेशों तक गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने राव को अंडरटेकिंग देने को कहा है कि पासपोर्ट/यात्रा दस्तावेज मिलने के 3 दिनों के भीतर वो भारत लौट आएंगे. राव पर तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में नेताओं और हाईकोर्ट जजों के फोन टैपिंग का आरोप है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए टिप्पणी की कि अदालत को पक्षों के हितों को संतुलित करना जरूरी है.

3 मई को तेलंगाना हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण की  याचिका को खारिज कर दिया था. राव की ओर से दलील दी कि वह अमेरिका से वापस नहीं आ पा रहे हैं और उन्हें भारत लौटने के लिए विशेष अनुमति के लिए आवेदन करना होगा. उन्होंने कहा कि जिस समय उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, उस समय वह अमेरिका गए हुए थे. बाद में उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया और उनका पासपोर्ट भी रद्द कर दिया गया. राव को वर्तमान राज्य सरकार ने इस हद तक परेशान किया है कि उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है.

तेलंगाना राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है और याचिकाकर्ता को किसी भी तरह की अंतरिम सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए. राज्य को उसकी अग्रिम जमानत पर प्रारंभिक आपत्ति है, क्योंकि वह एक भगोड़ा है और कानून किसी भगोड़े को अग्रिम जमानत की राहत पाने की अनुमति नहीं देता है. इस संबंध में एक न्यायिक आदेश है, जिसमें उसे भगोड़ा घोषित किया गया है. जांच अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने भी अग्रिम जमानत की याचिका का विरोध किया, लेकिन अदालत ने कहा कि फिलहाल राव के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं होगी.

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