सुप्रीम कोर्ट ने आज उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें मुगल बादशाह बाबर के नाम पर कोई भी मस्जिद नहीं बनाने देने की मांग की गई थी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान याचिककर्ता के वकील ने तर्क दिया कि बाबर के नाम पर देश में किसी भी मस्जिद का निर्माण नहीं होना चाहिए. याचिकाकर्ता के वकील ने बाबर को आक्रांता बताया है.
कोर्ट में दलील दी गई कि बाबर ने हिंदुओं को गुलाम कहा था. याचिका में मांग की गई है कि ऐसे लोगों के खिलाफ तो कार्रवाई की जानी चाहिए. याचिका में मांग की गई कि अधिकारियों को आदेश दिया जाए कि बाबर के नाम पर किसी मस्जिद के निर्माण पर रोक लगे. गौरतलब है कि हाल में ही टीएमसी से निलंबित किए गए विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव बंगाल में रखी है. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में कबीर ने कहा था कि वो यहां बाबरी मस्जिद बनाएंगे.
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की इजाजत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा था कि 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को कानून के शासन का घोर उल्लंघन बताया था. कोर्ट ने अपने इस फैसले में सरकार को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या के किसी मशहूर जगह पर ये जमीन देने का आदेश शासन को दिया था.














