- देशभर में भीषण गर्मी का दौर जारी है और बारिश के बावजूद राहत नहीं मिल रही है
- इस साल मॉनसून सामान्य से कम बारिश करेगा और अल नीलो प्रभाव के कारण गर्मी और सूखे की स्थिति गंभीर हो सकती है
- अगस्त और सितंबर में उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में बारिश कम होने से सूखे की स्थिति बन सकती है
राजधानी दिल्ली समेत देशभर के कई राज्यों में भीषण गर्मी का दौर जारी है. बीच-बीच में बारिश हो रही है, लेकिन गर्मी से राहत नहीं मिल रही. मौसम विभाग ने 26 मई से केरल में मॉनसून के दस्तक देने की भविष्यवाणी भी कर दी है. लेकिन इसी के साथ मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम बरसेगा और अल नीलो प्रभाव की वजह से गर्मी सताएगी. IMD के अलावा दुनियाभर की अन्य मौसम एजेंसियों ने भी अल नीनो को लेकर चेतावनी जारी की है. प्रशांत महासागर में तेजी से बन रहा 'सुपर अल नीनो' इस साल भारतीय मॉनसून को बुरी तरह सुखाने वाला है. वैज्ञनिकों की मानें तो यह अल नीनो 1997 और 2015 के खतरनाक दौर जितना ही भयानक हो सकता है. भारत के कुछ हिस्सों पर इसका सबसे बुरा असर देखने को मिल सकता है.
कहां सबसे ज्यादा सताएगा अल नीनो?
मौसम एक्सपर्ट्स के अनुसार इस साल अल नीनो के प्रभाव से अगस्त और सितंबर के महीनों में बारिश काफी कम हो जाएगी, जिससे देश के कई हिस्से सूखे की चपेट में आ सकते हैं. सबसे ज्यादा मार देश के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों पर पड़ने वाली है. यहां भीषण गर्मी पड़ेगी. सूखे की स्थिति की वजह से फसलों को नुकसान होगा. यह स्थिति इसलिए भी डराने वाली है क्योंकि भारत के लगभग 60% किसान अपनी खरीफ की फसल के लिए पूरी तरह से मॉनसूनी बारिश पर निर्भर हैं. कम बारिश होने से कृषि क्षेत्र को भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है.
इन हिस्सों में पड़ेगी सूखे और गर्मी की सबसे तगड़ी मार
- मध्य प्रदेश के शहर: मध्य प्रदेश में हालात काफी गंभीर हो सकते हैं. इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम जैसे इलाकों में सामान्य से काफी कम बारिश होने की आशंका है.
- पंजाब, हरियाणा और राजस्थान: ये राज्य अगस्त और सितंबर के महीनों में सबसे ज्यादा संवेदनशील रहेंगे, जहां बारिश गायब होने से खेतों सूखे जैसी स्थिति बन सकती है.
- दिल्ली-NCR: राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाके, जो पहले ही भीषण गर्मी और लू के थपेड़े सह रहे हैं, उनके लिए राहत की कोई उम्मीद नहीं है. यहां भी सामान्य से कम बारिश पड़ेगी.
- यहां भी सूखे का संकट: दक्षिण-पूर्वी महाराष्ट्र, उत्तरी कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी हालात बेकाबू हो सकते हैं.
26 मई को आ रहा मॉनसून
इस बीच मौसम विभाग ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के 26 मई को केरल में समय से पहले दस्तक दे सकता है. आमतौर पर केरल में मॉनसून की शुरुआत एक जून के आसपास होती है, जिसके बाद यह उत्तर की ओर बढ़ते हुए देश के बाकी हिस्सों में पहुंचता है. इसके साथ ही देश में मॉनसून मौसम (जून से सितंबर) की शुरुआत मानी जाती है. पिछले साल मॉनसून की शुरुआत 24 मई को हुई थी. आईएमडी ने कहा है कि मॉनसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है. हालांकि यह चार दिन पहले या चार दिन बाद भी पहुंच सकता है.
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