- उन्होंने संसद में 126 प्रश्न पूछे जो राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं, लेकिन बहसों में भागीदारी सीमित रही है
- फरवरी 2025 में राज्यसभा के उपाध्यक्षों के पैनल में नामित होना उनके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है
- सुनेत्रा पवार को अजित पवार की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए नीति और नेतृत्व कौशल दोनों साबित करने होंगे
महाराष्ट्र की सियासत में जब भी 'पवार' नाम आता है, तो सत्ता के ‘पावर' की याद आती है. लेकिन आज चर्चा का केंद्र पवार परिवार का कोई मंझा हुआ राजनेता नहीं, बल्कि वह चेहरा है जिसने दशकों तक पर्दे के पीछे रहकर संगठन और राजनिती को करीब से देखा है . सुनेत्रा अजित पवार वहिनी (भाभी). उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बाद पैदा हुए राजनीतिक शून्य और उत्तराधिकार की जंग के बीच, राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार अब केवल एक 'वहिनी' नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रही हैं. अजित पवार गुट के नेता ‘वईनी' के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार है. शैक्षणिक रूप से स्नातक सुनेत्रा पवार का अब तक का संसदीय रिकॉर्ड औसत स्तर का रहा है.
भले ही सक्रिय राजनीति की पिच पर उनका औपचारिक अनुभव पारंपरिक अर्थों में बहुत अधिक रोमांचक या 'एग्रेसिव' न दिखे, लेकिन उनकी व्यक्तिगत स्थिति उन्हें एक ऐसे ऊंचे पायदान पर खड़ा करती है जहाँ से उन्होंने सत्ता और नीति-निर्माण के हर उतार-चढ़ाव को बहुत करीब से देखा है . पवार परिवार के भीतर दशकों तक राजनीति और प्रशासन की बारीकियों को उन्हे देखने का मौका मिला है . वे केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि वे उस 'हाई टेबल' का हिस्सा रही हैं जहां महाराष्ट्र और देश के बड़े राजनीतिक फैसले लिए जाते रहे हैं . आईए उनके संसद के कार्यकाल पर नजर करें. राज्यसभा की वैबसाईट पर उपलब्ध डेटा के अनुसार उन्होने संसद में कम शब्दो में लेकिन सटीक सवाल रखे है.
PRS के आंकड़े उनके संसदीय सफर की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं
- सक्रियता: उन्होंने अब तक 126 प्रश्न पूछे हैं, जो राष्ट्रीय औसत (92) से काफी अधिक है. उनके सवाल सीधे तौर पर कृषि, रेल परियोजनाएं, पश्चिमी घाट का संरक्षण और नासिक कुंभ मेला 2027 जैसी ज़मीनी ज़रूरतों से जुड़े रहे.
- चुनौती: हालांकि, बहसों (Debates) में उनकी भागीदारी (मात्र 4 बार) और उपस्थिति (69%) यह संकेत देती है कि सदन के भीतर अभी उन्हें अपनी आक्रामक पहचान बनानी बाकी है.
- संसदीय कद: फरवरी 2025 में राज्यसभा के उपाध्यक्षों के पैनल में उनका नामित होना यह दर्शाता है कि उनका राजनैतिक वजन भारी है.
सुनेत्रा पवार ने औरंगाबाद के एस.बी. कॉलेज से बी.कॉम किया है. हालांकि बी. कॉम की डिग्री के बवजूद उन्होने बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क जैसे बड़े औद्योगिक उपक्रम का नेतृत्व किया, जहाँ उत्पादन, निवेश, रोजगार और महिला सशक्तिकरण—चारों मोर्चों पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी रही. वहीं एक बिजनेस एंटरप्रेन्योर के रूप में उन्होंने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को संस्थागत प्रबंधन में बदला. विद्या प्रतिष्ठान जैसे विशाल शैक्षणिक समूह में ट्रस्टी की भूमिका निभाते हुए वे 25,000 से अधिक छात्रों की शिक्षा, अकादमिक गुणवत्ता और प्रशासनिक ढांचे की निगरानी कर रही हैं.
पवार परिवार का एक स्वच्छ चहेरा
सुनेत्रा पवार अपने कार्यो के जरिए अकसर सुर्खीयां नहीं बटोरती लेकिन उनकी वैबसाईट पर बताई हुई जानकारी के अनुसार उन्होने 2010 में उन्होंने एनवायरमेंटल फॉर्म ऑफ इंडिया (EFOI) की स्थापना की जिसके तहत उन्होंने कटेवाड़ी गांव को देश का पहला 'इको-विलेज' बनाने में अहम भूमिका निभाई, जहाँ जल संरक्षण और सौर ऊर्जा की मिसाल दी जाती है. इसी के साथ 'बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क' की चेयरपर्सन के रूप में उन्होंने 15,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया. विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी के रूप में वे 25,000 से अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रही हैं.
क्या सुनेत्रा पवार अपने पती की जगह ले पाएंगी?
सुनेत्रा पवार की सबसे बड़ी ताकत है उनकी पार्टी के नेताओ का उनके प्रति झुकाव . उनके पास परिवार की विरासत भी है और सामाजिक कार्यो का अनुभव भी. लेकिन राजनीति के इस नए अध्याय में उनके सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं. अजित पवार की विरासत को आगे ले जाने के लिए उन्हें केवल 'पॉलिसी' (नीति) नहीं, बल्कि राजनीतिक 'एग्रेसन' (आक्रामकता) और प्रशासनिक नेतृत्व की कसौटी पर भी खुद को साबित करना होगा.
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