सोनिया गांधी से बात करने के बाद ही उपमुख्यमंत्री बनने पर राज़ी हुए डी.के. शिवकुमार

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने बुधवार देर शाम डी.के. शिवकुमार से बात की थी, और उसके बाद वह नंबर 2 पद के लिए राज़ी हो गए. बताया गया है कि बेंगलुरू में शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को आयोजित किया जाएगा.

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डी.के. शिवकुमार ने राज्य का उपमुख्यमंत्री पद सोनिया गांधी से बातचीत के बाद ही कबूल किया...
नई दिल्ली:

लम्बी चर्चा और विचार-विमर्श के बाद कर्नाटक की कांग्रेस इकाई के प्रमुख डी.के. शिवकुमार ने राज्य का उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार कर लिया है, और ऐसा पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दखल के बाद मुमकिन हो पाया. यह दावा सूत्रों ने किया है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धारमैया को चुना है, और शिवकुमार उनके डिप्टी होंगे.

यह तब तय हो पाया, जब बुधवार देर शाम सोनिया गांधी ने शिवकुमार से बातचीत की. उससे पहले तक, शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़े हुए थे. कांग्रेस का विचार सिद्धारमैया को दूसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री पद सौंपने का है, लेकिन अब तक शिवकुमार इसी पद के लिए ज़िद पर अड़े हुए थे.

सिद्धारमैया और शिवकुमार, दोनों नेताओं ने बुधवार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की थी - और सूबे के शीर्ष पद के लिए अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत किया था.

सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने बुधवार देर शाम शिवकुमार से बात की थी, और उसके बाद वह नंबर 2 पद के लिए राज़ी हो गए. बताया गया है कि बेंगलुरू में शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को आयोजित किया जाएगा.

डी.के. शिवकुमार पिछले चार साल के दौरान किए हुए अपने काम का हवाला देते हुए राज्य के शीर्ष पद पर दावा पेश कर रहे थे - दरअसल, चार साल पहले एच.डी. कुमारस्वामी की जनता दल सेक्युलर (JDS) के साथ कांग्रेस की गठबंधन सरकार विधायकों के बड़े गुट द्वारा दलबदल के बाद गिर गई थी. लेकिन साथ ही शिवकुमार ने यह भी कहा था कि वह 'ब्लैकमेल' का सहारा नहीं लेंगे.

उन्होंने कहा था कि उन्होंने गांधी परिवार और मल्लिकार्जुन खरगे को आश्वासन दिया था कि वह कर्नाटक जीतकर पार्टी को देंगे.

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डी.के. शिवकुमार ने NDTV से एक विशेष इंटरव्यू में कहा था, "सोनिया गांधी ने मुझसे कहा था, 'मुझे आप पर भरोसा है कि आप कर्नाटक जीतकर देंगे...' मैं यहां हूं, अपनी नियमित ज़िम्मेदारी निभा रहा हूं... अब आपके पास बुनियादी शिष्टाचार होना चाहिए, थोड़ा सा आभार जताएं... इतना शिष्टाचार तो होना ही चाहिए कि स्वीकार करें कि जीत के पीछे कौन है..."

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