- JNU में PM मोदी और अमित शाह के खिलाफ की गई विवादित नारेबाजी के मामले में FIR दर्ज कर ली गई है.
- JNU प्रशासन ने नारेबाजी करने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है.
- दूसरी ओर छात्र संघ ने इस मुद्दे को वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया है.
JNU News: देश की राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार विवादों में है. सोमवार रात JNU कैंपस में कुछ छात्रों ने नारेबाजी की- 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, JNU की धरती पर'. मंगलवार को नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद अब यह मामला चर्चाओं में है. जेएनयू प्रशासन ने इस मामले में वंसतकुंज (उत्तर) थाने में शिकायत दर्ज कराई है. मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट चुकी है. दूसरी ओर जेएनयू प्रशासन भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है.
नारेबाजी करने वाले छात्रों का हो सकता है निलंबन
विवादित नारे लगाने में शामिल छात्रों के खिलाफ JNU प्रशासन कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी में है. छात्रों को तत्काल निलंबन का सामना करना पड़ सकता है. गंभीर मामलों में विश्वविद्यालय से निष्कासन की कार्रवाई हो सकती है. संबंधित छात्रों को विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जा सकता है.
JNU प्रशासन ने कहा- विवि को नफरत फैलाने का स्थान नहीं बनने दे सकते
सोशल मीडिया मंच ‘X' पर एक पोस्ट में विश्वविद्यालय ने कहा, “इस घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है. प्रशासन ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने का वादा किया है.” विश्वविद्यालय ने कहा कि हालांकि बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन विश्वविद्यालय सीखने और नवाचार के केंद्र हैं और उन्हें नफरत फैलाने का स्थान नहीं बनने दिया जा सकता.
नारेबाजी वाले मामले में जेएनयू ने एक्स पोस्ट में कड़ी कार्रवाई की बात कही है.
5 जनवरी 2020 की घटना के खिलाफ कैंडल मार्च
दूसरी ओर जेएनयू स्टूडेंट यूनियन ने कहा है कि यह मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है. JNUSU ने कहा कि 2020 में जेएनयू में छात्रों पर हमलों की स्मृति को जीवित रखने और साबरमती हॉस्टल में हो रहे अन्याय को उजागर करने के लिए 5 जनवरी 2026 को एक कैंडल मार्च का आयोजन किया था.
लेकिन एक वर्ग ने वास्तविक सवालों से ध्यान भटकाने के लिए कैंडल मार्च को गलत तरीके से पेश किया. ये मानहानि के प्रयास जेएनयू को बदनाम करने और छात्रों पर अत्याचार बढ़ाने का एक संगठित प्रयास हैं. जेएनयूएसयू मानहानि और बदनामी के ऐसे प्रयासों की निंदा करता है.
नारेबाजी का वीडियो देखिए
छात्रसंघ ने कहा- मुद्दों से ध्यान भटकाने का संगठित प्रयास
जेएनयूएसयू शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन करने का पक्षधर है. 5 जनवरी 2026 का कैंडल मार्च विश्वविद्यालय समुदाय द्वारा झेली गई हिंसा के खिलाफ था. छात्रों पर नकाबपोश गुंडों द्वारा किए गए क्रूर हमलों और असहमति की आवाज़ों को अन्यायपूर्ण ढंग से जेल में डालने जैसी वास्तविक हिंसा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, इन मुद्दों से ध्यान भटकाने और गुमराह करने का एक संगठित प्रयास किया जा रहा है.
जेएनयूएसयू ऐसे प्रयासों की निंदा करता है और असहमति व्यक्त करने के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने और उनकी रक्षा करने तथा उन्हें कमजोर करने और नकारने के सभी प्रयासों का विरोध करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है.
5 जनवरी 2020 को JNU में छात्रों पर हुआ था हमला
मालूम हो कि 5 जनवरी 2020 को कुछ नकाबपोश हथियारबंद बदमाशों ने जेएनयू परिसर में घुसकर साबरमती हॉस्टल और अन्य क्षेत्रों में छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था. यह हमला फीस वृद्धि का विरोध कर रहे छात्रों पर था. इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही. JNUSU ने 2020 की इस घटना को जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना के 6 साल बीत चुके हैं. फिर भी, आज तक अपराधी कानून की नजरों में "नकाबपोश" हैं, जबकि उनकी पहचान सभी को ज्ञात है.
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