- ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला शुक्रवार को लखनऊ स्थित अपने घर पहुंचे.
- सुरक्षा कारणों से शुभांशु को गेस्ट हाउस में रुकने की अनुमति मिली थी और आज वे कुछ समय के लिए घर गए.
- शुभांशु के माता-पिता ने बेटे के घर आने पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए समय निकालने की सराहना की.
Shubhanshu Shukla Lucknow: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला शुक्रवार को लखनऊ स्थित अपने घर पहुंचे. बेटे को घर पर देख माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने कहा, "हमने बेटे से आने को कहा था और उसने व्यस्तता के बावजूद समय निकाला, हमारी बात मानी और मान बढ़ाया." इस दौरान परिजन और अन्य शुभचिंतकों से घिरे शुभांशु भी काफी भावुक नजर आए. मालूम हो कि लखनऊ आने के बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें अपने घर रुकने की अनुमति नहीं मिली थी, इसलिए वो गेस्ट हाउस में रुके थे. आज शुभांशु कुछ देर के लिए अपने घर गए और परिजनों के साथ अपने घर में समय बिताया.
शुभांशु के पिता बोले- हमें बहुत खुशी
इस मौके पर शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ला ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लगा कि मेरा बेटा घर पर आया. उसके आने के बाद सभी के चेहरे खिल उठे. जैसे ही आसपास के लोगों को पता लगा, सब उससे मिलने के लिए आए. उसने सभी लोगों से बात की. उसका घर आना जरूरी था. हमें बहुत खुशी है. मेरे बेटे से कई विषयों को लेकर बात हुई. एक बार उसका कार्यक्रम पूरा हो जाए, तो इसके बाद हम बेंगलुरु जाएंगे.
शुभांशु की मां बोली- मैं लंबे समय से इंतजार कर रही थी
शुभांशु की मां आशा ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लगा कि हमारा बेटा घर आया. मैं लंबे समय से इंतजार कर रही थी. ऐसी स्थिति में हमें लग रहा था कि शायद उसका आना मुश्किल हो जाएगा. लेकिन, जैसे ही हमें पता लगा कि वह आया है, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. गुरुवार को मैंने अपने बेटे से कहा था कि कैसे भी करके समय निकालकर घर आए और उसने हमारी बात का मान रखा.
घर आकर बहुत अच्छा लग रहा हैः शुभांशु शुक्ला
इस मौके पर भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा, "वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है. लखनऊ में मैंने जो प्यार और उत्साह देखा, वह वाकई मेरी उम्मीदों से बढ़कर था. घर आकर बहुत अच्छा लग रहा है और मैं बहुत उत्साहित हूं. इस अंतरिक्ष मिशन को लेकर लोगों में ऊर्जा और उत्साह देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है..."
शुभांशु की मां बोलीं- शब्दों में बयां नहीं कर सकती खुशी
ये पूछे जाने पर कि आपने अपने बेटे के लिए खास पकवान भी बनाया था, तो इस पर उन्होंने कहा कि नहीं, ऐसा कुछ मैंने नहीं बनाया था. हमारे घर में जो भी सामान्य तौर पर बनता है, वही बनाया था. वो तो मेरा बेटा है. जैसा मेरे लिए पहले था, वैसे ही आज भी है. हमें बहुत खुशी हुई कि वो समय निकालकर हमारे बीच में आया. हम अपनी खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं.
मां के हाथों बने खाना खाया
शुभांशु शुक्ला के चचेरे भाई आशीष ने कहा कि हमें बहुत अच्छा लगा कि शुभांशु हमारे बीच में आए और अपनी मां का बना खाना खाया. उसके लिए मठरियां बनाई गई थीं, जिसे उसने बहुत ही चाव से खाया था. हमने रुकने के लिए कहा, तो उसने कहा कि उसे किसी जरूरी काम से कहीं जाना है. ऐसी स्थिति में उसके लिए अभी यहां पर रुक पाना मुश्किल है.
एक भाई होने के नाते मुझे लगता है कि उसे यहां पर आना चाहिए था. वह आया, और हमें बहुत खुशी मिली है. इस दौरान हमने उससे कहा कि लखनऊ में एक एयरशो की जरूरत है. अगर ऐसा करते हैं, तो निश्चित तौर पर इससे आने वाली पीढ़ियों को व्यापक स्तर पर फायदा पहुंचेगा.
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