- संभल के हालात पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शुभांकर मिश्रा की कचहरी पर एक्सक्लूसिव बातचीत की.
- कृ्ष्णम ने दावा किया कि संभल के हिंदुओं में डर है कि 2027 में सरकार बदली तो आबादी 5% भी नहीं बचेगी.
- उन्होंने मायावती, मुलायम, अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस के राहुल और प्रियंका गांधी तक पर निशाना साधा.
यूपी के संभल में हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को लेकर सियासी बवाल मचा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आजादी के बाद से संभल में हिंदुओं की आबादी 45 पर्सेंट से घटकर 15 पर्सेंट रह गई है. इसकी वजह क्या रही, इसे लेकर एनडीटीवी पर शुभांकर मिश्रा ने आचार्य प्रमोद कृष्णम से एक्सक्लूसिव बातचीत की. कृ्ष्णम ने इस दौरान कहा कि संभल के हिंदुओं में इतना डर है कि अगर 2027 में यूपी की सरकार बदली तो हिंदुओं की आबादी 5 पर्सेंट भी नहीं बचेगी. उन्होंने मायावती, मुलायम सिंह, अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस के राहुल गांधी और प्रियंका गांधी तक पर निशाना साधा.
संभल में हिंदुओं पर हमलों की क्या वजह?
क्या संभल में सुनियोजित तरीके से हिंदू आबादी को कम किया जा रहा है? इस सवाल पर कल्कि धाम के पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम ने कहा कि संभल का जिक्र पुराणों और श्रीमद्भागवत में भी है, जिसमें कहा गया है कि कल्कि अवतार यहीं पर होगा. इसीलिए हमने वहां कल्कि धाम बनाने का फैसला किया. पिछले साल कार्यक्रम में पीएम मोदी भी आए. उन्होंने कहा कि बाबर के जमाने में संभल के मंदिरों को तोड़े जाने से लेकर आजादी के बाद यहां हुए दंगों तक के पीछे संभवतः यही वजह है.
शफीकुर्रहमान बर्क के परिवार का दबदबा
सियासत से लेकर धार्मिक मामलों में सक्रिय रहे प्रमोद कृष्णम ने कहा कि आजादी के बाद संभल से जितने भी सांसद-विधायक रहे, उनमें से ज्यादातर डॉ शफीकुर्रहमान बर्क के परिवार के थे. मायावती की सरकार हो या मुलायम सिंह की, बर्क साहब सभी के साथ आते-जाते रहे. सांसद रहे, मंत्री भी बने. अब उनके पोते साहब सांसद हैं.
उन्होंने कहा कि संभल शहर के बीच मौजूद जामा मस्जिद को हिंदू हर मंदिर कहते हैं. हिंदुओं में ऐसी मान्यता, ऐसी धारणा है कि भगवान का अवतार जब होगा तो ये उसका सेंटर होगा. 1973, 1976, 1978 में जो दंगे भड़के, वो इसी को लेकर भड़के. उस जमाने में लगातार 62 दिन संभल में मार्शल लॉ लागू रहा, जिसमें हज़ारों हिन्दुओं का कत्ल किया गया था.
बर्क को बताया बेहद कट्टर इंसान
प्रमोद कृ्ष्णम ने आरोप लगाया कि संभल के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के कहने पर तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने कल्कि धाम के निर्माण पर रोक लगा दी थी. उन्होंने दावा किया कि संभल में श्रीमद्भागवत करने की भी अनुमति लेनी पड़ती थी. देवी जागरण के मंचों को पुलिस आकर गिरा देती थी. मायावती, मुलायम और अखिलेश की सरकारों में ऐसा हुआ. उन्होंने इसके पीछे तब के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को बताया. आरोप लगाया कि वह बहुत फैनेटिक (कट्टर) इंसान थे.
'सरकार बदली तो हिंदुओं की आबादी घटेगी'
प्रमोद कृष्णम ने दावा किया कि इंटेलिजेंस एजेंसियों ने जब संभल में कुछ आतंकवादियों को पकड़ा था तो सांसद शफीकुर्रहमान ने खुलेआम कहा था कि मैं इनके साथ हूं. कृष्णम ने दावा किया कि संभल में हिंदू मानते हैं कि 2027 में अगर किसी वजह से सरकार बदली तो संभल शहर में जो 15 पर्सेंट हिंदू बचे हैं, वो 5 पर्सेंट भी नहीं रह जाएंगे. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि वहां के हालात ठीक हो पाएंगे क्योंकि आबादी में इतना बड़ा गैप आ चुका है.
अखिलेश की हिम्मत नहीं थी कि...
उन्होंने कहा कि स्थानीय मुसलमानों में कुछ अच्छे लोग भी हैं. लेकिन वहां की राजनीति पर, चाहे सपा हो, बसपा हो या कांग्रेस हो, सभी में शफीकुर्रहमान के परिवार और उनके साथियों का कब्जा है. कृष्णम ने कहा कि मैं अखिलेश यादव या किसी और को टारगेट नहीं करना चाहता, लेकिन अखिलेश यादव की हिम्मत नहीं थी कि बर्क साहब के सामने कुछ कह सकें. अखिलेश भी हिंदू हैं, और मुझे नहीं लगता कि कल्कि धाम के निर्माण पर पाबंदी, जागरण-भागवत रोकने और कथा का पंडाल गिराने जैसी घटनाओं पर उन्हें खुशी हुई होगी. लेकिन उनकी हिम्मत नहीं थी कि शफीकुर्रहमान से, आज़म खान से बात कर सकें.
कांग्रेस नेताओं में भी डर थाः कृष्णम
प्रमोद कृष्णम ने दावा करते हुए कहा कि जब कल्कि धाम के निर्माण पर पाबंदी लगी थी, तब मैं कांग्रेस में था. कांग्रेस और सपा के बड़े-बड़े नेता वहां आते थे. मैं कांग्रेसियों से कहता था कि आप बात क्यों नहीं करते, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं होती थी. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी एक बार भी कल्कि धाम नहीं आए. उन्हें क्या डर था. आखिर कोई तो डर था. वो कभी अयोध्या के राम मंदिर नहीं गए. कृष्णम ने दावा किया कि जब राम मंदिर का मुकदमा चल रहा था तो हमसे कहा जाता था कि आप टीवी पर ये बोलिए कि फैसला आने तक ये विवादित स्थल है. उसे राम मंदिर मत कहिए.