- शरद पवार एक बार फिर से संसद के उच्च सदन राज्यसभा जा सकते हैं
- शिवसेना उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने इस बारे में जानकारी दी है
- खास बात ये है कि शरद ने पहले राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया था
महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा नाम और वहां की राजनीति के पितामह कहे जाने वाले शरद पवार ने इस साल अप्रैल में होने राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. शिवसेना (उद्धव) गुट के नेता संजय राउत इस बारे में बयान दिया है. जब एनडीटीवी ने इस बारे में शरद पवार की पार्टी के नेताओं से संपर्क किया तो उन लोगों ने भी इससे इनकार नहीं किया है.
सियासी गलियारे में चर्चा
सियासी गलियारे में इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि आखिर शरद पवार की इस बदली हुई रणनीति का कारण क्या है? क्योंकि उन्होंने ही पहले कहा था कि इस बार वो राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं. वयोवृद्ध नेता ने कहा था कि वह 85 साल के हो चुके हैं. शरद पवार ने 50 साल के अधिक के राजनीतिक जीवन में 14 चुनाव लड़ें है और कभी हारे नहीं हैं.
शरद पवार के दिल में क्या है?
शरद ने कहा था, नहीं लड़ेंगे चुनाव
कुछ दिनों पहले जब उन्होंने राज्यसभा का चुनाव ना लड़ने की बात कही थी. तब यह तय हो चुका था कि दोनों एनसीपी का विलय 12 फरवरी को हो जाएगा और शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार को महाराष्ट्र और बेटी सुप्रिया सुले को दिल्ली की राजनीति की बागडोर सौंप कर राजनीति से संन्यास ले लेंगे. मगर अजित पवार के असामयिक निधन ने सब कुछ बदल दिया. अजित दादा के निधन के कुछ ही दिनों बाद सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की शपथ ली. हालांकि, तब शरद पवार ने कहा संकेतों में नाराजगी जताते हुए कहा था कि ये बात उन्हें मीडिया से पता चली है. इसी के साथ यह भी तय हुआ कि अब दोनों एनसीपी का विलय भी नहीं होगा. इस बीच, शरद पवार के उत्तराधिकारी माने जाने वाले रोहित पवार दो दिनों तक दिल्ली में रहते हैं और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा करते हैं कि अजित पवार का विमान दुर्घटना एक हादसा नहीं साजिश थी.
शरद के हाथ में सियासत का बटन
शरद के मन में क्या है?
ऐसे हालात में शरद पवार का राज्यसभा सीट के लिए फिर से हामी भरना कई राजनीतिक समीकरण के संकेत दे रहा है. पहला संकेत ये मिल रहा है कि दोनों एनसीपी अब अलग-अलग राह पकड़ चुकी है. सुनेत्रा पवार एनडीए के साथ रहेंगी और शरद पवार वाली एनसीपी विपक्ष में. वैसे भी अपने इतने लंबे राजनीतिक सफर में शरद पवार कभी बीजेपी के साथ नहीं गए. मतलब ये मामला अभी लंबा चलेगा क्योंकि अब कहा जा रहा है कि जब दोनों एनसीपी एक नहीं हो रहे तो शरद पवार को सक्रिय राजनीति से दूर नहीं रहना चाहिए क्योंकि उनके रहने भर से काफी फर्क पड़ेगा और वो आगे की रणनीति भी बनाएंगे जो शायद दोनों एनसीपी के हित में हों. परिवार में सबसे बड़े होने के नाते ऐसी बहली हुई परिस्थिति में उनका सक्रिय रहना जरूरी है. इसके साथ ही यह भी सवाल उठता है कि अभी जिस एनसीपी के विलय पर ब्रेक लगा है क्या यह आने वाले दिनों में संभव है?
शरद पवार का नया सियासी दांव
शरद पवार राज्यसभा कैसे जाएंगे?
पर अभी सबसे बड़ा सवाल ये है कि शरद पवार राज्यसभा में आएंगे कैसे? क्योंकि एनसीपी (शरद) के पास महाराष्ट्र में केवल 10 विधायक हैं. हालांकि, कुछ दिन पहले शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने एनडीटीवी से कहा था कि राज्य में पहले भी लोग निर्विरोध राज्यसभा चुनकर आए हैं. तो क्या शरद पवार निर्विरोध आएंगे? ये भविष्य के गर्भ में छिपा है.
महाराष्ट्र में सीटों का समीकरण
इसी साल अप्रैल में महाराष्ट्र के 7 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. महाराष्ट्र में कुल 288 विधायक हैं और एक राज्यसभा सीट के लिए 37 वोट चाहिए. महाराष्ट्र में एनडीए कुल 228 विधायक हैं जिसमें बीजेपी के 131,शिव सेना (शिंदे) के 57 और एनसीपी (अजित पवार) के 40. यानी एनडीए 7 में से 6 सीटें जीत सकती है. अब एनडीए ये तय करेगी कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर लड़ती है. राज्य में दो फॉर्मूले की बात चल रही है. बीजेपी 4, शिवसेना (शिंदे) 1, और एनसीपी (अजित) 1 सीट से चुनाव लड़ सकती है. या फिर बीजेपी 3, शिंदे-2 और एनसीपी 1 सीट पर चुनाव लड़ सकती है.
शरद के नाम पर बनेगी सहमति?
दूसरी तरफ पूरे विपक्ष के पास 46 विधायक हैं जिसमें शिवसेना (उद्धव) के 20,कांग्रेस के 16 और एनसीपी (शरद पवार) के 10 हैं. यानी पूरा विपक्ष किसी एक नाम पर सहमत हो तो एक उम्मीदवार को जितवा सकता है. ऐसे में शरद पवार से बेहतर नाम कोई और नहीं हो सकता है. कहते हैं ना जब तक शरद पवार हैं तब तक आप उन्हें देश और खासकर महाराष्ट्र की राजनीति से दूर नहीं कर सकते.














