आजादी के बाद ही दबा दी गई जनता की आवाज, तिरंगा फहराने के बाद बोले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज में चल रहे माघमेले में मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान से रोके जाने के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना सोमवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गया. उन्होंने उसी जगह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया, जहां उनका धरना चल रहा है.

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प्रयागराज:

प्रयागराज के संगम तट पर लगे माघ मेले में पिछले नौ दिन से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिविर के बाहर प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे हुए हैं. गणतंत्र दिवस पर सोमवार को उन्होंने अपने धरनास्थल पर ही झंडा फहराया और वहां मौजूद लोगों को समर्थन किया. झंडा फहराने के बाद उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ही जनता की आवाज दबा दी गई.  

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन का विवाद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शिविर माघ मेला के सेक्टर-चार में स्थापित है. वो इस शिविर के बाहर ही धरना दे रहे हैं. गणतंत्र दिवस पर उन्होंने अपने शिविर के बाहर शिष्यों, अनुयायियों और श्रद्धालुओं के साथ ध्वजारोहण किया और राष्ट्रगान गाया. इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'भारत माता की जय' के जयकारे भी लगाए. उन्होंने एकता का संदेश दिया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जैसे ही देश जनतंत्र घोषित हुआ वैसे ही जनता की आवाज को दबा दिया गया.उन्होंने कहा कि अंग्रेज अंग्रेजी तिथियां थोपना चाहते थे लेकिन भारत के लोग भारतीय तिथियों से प्रेम करते थे. दुर्भाग्यवश अंग्रेजों के जाने के बाद हमारी सरकारें ही इतनी अंग्रेज बन गईं कि भारतीय तिथियां भुला दी गईं.

18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रशासन के साथ विवाद हुआ था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी पालकी सहित संगम तट पर स्नान के लिए जाना चाहते थे. लेकिन प्रशासन ने उनको पालकी से उतरकर स्नान के लिए जाने को कहा था. इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पुलिस से बहस भी हुई थी. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस विवाद के बाद अपने शिविर के बाहर उस दिन से धरने पर बैठे हुए हैं. 

कितने दिन से चल रहा है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के धरने को नौ दिन पूरे हो चुके हैं. लेकिन विवाद के पटाक्षेप अभी तक नहीं हो पाया है. आरोप और प्रत्यारोप के दौर दोनों के बीच जारी है.प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से इनकार करते हुए उनको नोटिस भी जारी किया है जिसका जवाब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील की तरफ से मेला प्रशासन को दिया जा चुका है. मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दो नोटिस अब तक दिए है. हालांकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से भी मेला प्राधिकरण को नोटिस भेजा गया है. लगातार दोनों तरफ से गतिरोध जारी है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मांग है कि जबतक  मेला प्रशासन उनसे माफी नहीं मांगेगा तबतक वो संगम स्नान और शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को समर्थन देने के लिए राजनीतिक पार्टियां भी मैदान में कूद चुकी हैं. कई पार्टियों के नेता स्वामी जी से मुलाकात कर चुके हैं. वहीं एक बड़ा कदम उठाते हुए यूपी के डिप्टी सीएम सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से विवाद खत्म करने की अपील की है. दो दिन पहले ही एक हिंदूवादी संगठन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर विरोध करते हुए भगवा झंडे लहराते हुए सीएम योगी के समर्थन में 'आई लव बुलडोजर बाबा' के नारे लगाए थे. इसे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में प्रदर्शन माना गया था. 

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