- अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिग के यौन शोषण के आरोपों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.
- अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नियुक्त किया गया था, लेकिन उनकी नियुक्ति को लेकर SC में केस चल रहा है.
- अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिर्मठ के नए शंकराचार्य के रूप में उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई थी.
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मामले ने अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. माघ मेला से शुरू हुआ यह गंभीर विवाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है. नाबालिग के यौन उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट जैसी संगीन धाराओं में घिरे स्वामी जी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है. हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए विवादों में रहना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी वे राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से लेकर अपनी पदवी की वैधता को लेकर कई बार सुर्खियों और कानूनी उलझनों में घिर चुके हैं.
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनसे जुड़े विवाद
फरवरी 2026 : उत्तर प्रदेश पुलिस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा 2-3 अज्ञात लोगों पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफ़आईआर दर्ज की.
कब शंकराचार्य बने?
संस्कृत व्याकरण, वेद, पुराण, उपनिषद, वेदांत, आयुर्वेद और शास्त्रों की गहन शिक्षा के बाद 1990 के दशक में उन्होंने संन्यास लिया. स्वामी करपात्री जी के अस्वस्थ होने पर वे उनकी सेवा में जुट गए और अंतिम समय तक उनके साथ रहे. इसी दौरान उनका संपर्क ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से हुआ. 15 अप्रैल 2003 को उन्हें दंड संन्यास की दीक्षा दी गई और तभी उन्हें नाम मिला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती. सितंबर 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) का शंकराचार्य नियुक्त किया गया. हालांकि, इस पद को लेकर तब से ही कुछ विवाद और कानूनी पेच सामने आते रहे हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में है. उनके वकील टीएन मिश्रा के अनुसार, 11 सितंबर, 2022 को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मृत्यु के बाद, 12 सितंबर, 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का 'पट्टाभिषेक' हुआ.
21 सितंबर, 2022 को स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने अभिषेक को रोकने के लिए एक अपील दायर की थी. हालांकि, मिश्रा ने दावा किया कि कोर्ट ने पाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछली कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे और अपने आदेश में कोर्ट ने खुद उन्हें "शंकराचार्य" कहा था.
कोर्ट ने क्या कहा
यह मामला 2020 से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. अक्टूबर 2022 में, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी. जस्टिस बी.आर. गवई और बी.वी. नागरत्ना की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया कि पुरी के गोवर्धन मठ के शंकराचार्य ने एक हलफनामा दायर किया है, जिसमें कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के रूप में नियुक्त करने का समर्थन नहीं किया गया है.
केस नंबर
- सी.ए. नंबर 003010 / 2020, 27-08-2020 को रजिस्टर्ड
- एसएलपी(सी) नंबर 034253 - / 2017, 08-12-2017 को रजिस्टर्ड
शंकराचार्य बने रहने पर कब-कब सवाल उठे?
सितंबर 2022 से ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बनाए जाने को लेकर विवाद रहा है. उसी समय संन्यासी अखाड़े ने उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया था. उस समय निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति नियमों के खिलाफ है. उनका कहना था कि शंकराचार्य की नियुक्ति की एक प्रक्रिया होती है, जिसका पालन नहीं किया गया.
अविमुक्तेश्वरानंद के बारे में
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं. उनका का जन्म 5 अगस्त, 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था. उनका मूल नाम उमाशंकर उपाध्याय है. उन्होंने वाराणसी के मशहूर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की है. पढ़ाई के दौरान वो छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे.वे 1994 में छात्रसंघ का चुनाव भी जीते थे. उमाशंकर उपाध्याय की प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही हुई. बाद में वे गुजरात चले गए.
अविमुक्तेश्वरानंद के बयान से कब-कब हुआ विवाद?
शंकराचार्य ने कहा कि राजनेताओं के कारण और तथाकथित उनकी राजनीति के कारण हमारा सनातन धर्म प्रभावित हो रहा है. हमारे धर्म मे चार वर्ण की व्यवस्था है. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र .वेदों में स्पष्ट कहा गया है कि चारों वर्ण भगवान से पैदा हुए हैं,मतलब सभी भाई-भाई हैं. लेकिन इन बातों को तोड़-मरोड़ कर सनातन धर्म के लोगों को ही एक दूसरे के सामने खड़ा किया जा रहा है और जिससे सनातन धर्म कमजोर हो रहा है.
'गाय हमारी माता, लेकिन सरकार काटने का लाइसेंस दे रही'
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राजनेताओं पर आरोप लगाया है कि उनकी स्वार्थी राजनीति के कारण सनातन धर्म कमजोर हो रहा है. वेदों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चारों वर्ण भगवान से उत्पन्न हुए हैं और सभी भाई-भाई हैं, लेकिन राजनीतिज्ञों ने लोगों को एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा कर दिया है. इसके अतिरिक्त, उन्होंने केंद्र सरकार की 'सबका साथ, सबका विश्वास' की नीति को 'छल की नीति' करार देते हुए कहा कि जो नेता वोट के लिए गाय की पूजा करते हैं. वहीं, सरकार चलाने के दौरान डॉलर के लालच में गौ-हत्या का लाइसेंस देते हैं.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सीधा हमला बोला है. प्रधानमंत्री के 'घुसपैठ' वाले बयान पर उन्होंने सरकार को अक्षम बताते हुए कहा कि यदि घुसपैठ हो रही है तो यह सुरक्षा व्यवस्था की विफलता है. वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनके राज में पश्चिमी यूपी 'मिनी पाकिस्तान' बन गया है, जैसा कि कुछ अन्य धर्मगुरु दावा करते हैं, तो यह उनके शासन की असफलता और सांठगांठ को दर्शाता है. वक्फ संशोधन बिल को उन्होंने मुस्लिमों के लिए 'सौगात-ए-मोदी' और एक राजनीतिक शिगूफा बताया, जिससे हिंदू समाज को कोई वास्तविक लाभ नहीं होने वाला.
शंकराचार्य ने राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के निमंत्रण को 'अधूरे मंदिर' के उद्घाटन के कारण ठुकरा दिया था और दिल्ली में केदारनाथ की प्रतिकृति बनाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ज्योतिर्लिंगों का स्थान शास्त्रों में तय है, जिसे बदला नहीं जा सकता. इसी कड़ी में उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को उनके संन्यास और शास्त्र ज्ञान पर खुला चैलेंज दिया, काशी कॉरिडोर के निर्माण में प्राचीन मूर्तियों के खंडित होने पर शोक जताया और केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब होने जैसे गंभीर आरोप लगाए. प्रयागराज महाकुंभ की भगदड़ में मौतों को छिपाने के मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को 'झूठा' तक कह दिया, जो उनके और वर्तमान सत्ता के बीच बढ़ते वैचारिक मतभेदों को स्पष्ट करता है.
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