सर्विस चार्ज पर रोक से क्या खान-पान महंगा हो जाएगा? होटल-रेस्तरां कर्मी भी नाराज

इस फैसले को पूरे भारत में होटल व्यवसायियों, रेस्तरां मालिकों और संघों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, जिनमें से कुछ ने कहा कि यह कदम उनके व्यवसायों को ‘प्रभावित नहीं करेगा‘, जबकि अन्य ने आशंका जताई है कि इससे उनके राजस्व पर असर पड़ सकता है.

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होटल व्यवसायियों, रेस्तरां मालिकों और संघों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है.
नई दिल्ली:

होटल या रेस्‍टोरेंट अब अपने खाने के बिल में स्‍वचालित रूप से या डिफाल्‍ट रूप से सर्विस चार्ज (Service Charge) नहीं जोड़ सकेंगे. इसके बाद कई रेस्तरां के कर्मचारियों ने सेवा शुल्क पर रोक लगाने के कदम पर नाखुशी जताई है, साथ ही उनमें से कई ने कहा है कि वे नुकसान की भरपाई के लिए मालिकों से वेतन वृद्धि की मांग‘ करेंगे. हालांकि ऐसे में इंडस्ट्री को होने वाले नुकसान की भरपाई एक बार फिर ग्राहकों से ही वसूली जाएगी और खान-पान महंगा हो जाएगा. 

27 साल के उत्तराखंड के मूल निवासी प्रकाश सिंह कोरंगा एक शेफ हैं, जो दक्षिण दिल्ली में लोकप्रिय फ्रैंचाइजी मोती महल डीलक्स रेस्तरां के एक आउटलेट में काम करते हैं. उन्होंने कहा कि सेवा शुल्क जो आनुपातिक रूप से कर्मचारियों के बीच विभाजित हो जाता है, ‘अतिरिक्त आय‘ के रूप में कार्य करता है.   

उन्होंने कहा, ‘मुझे इस इंडस्ट्री में लगभग पांच साल हो गए हैं. एक शेफ के रूप में मैं मेहमानों के लिए सबसे अच्छा खाना बनाना जारी रखूंगा, लेकिन इस फैसले ने हमारे मनोबल को प्रभावित किया है, क्योंकि अब हमें केवल अपने वेतन से ही संतुष्ट रहना होगा. क्या महंगाई के इस समय में सिर्फ 14,000 रुपये के वेतन के साथ जीवित रहना संभव है. हमें नए मानदंडों का पालन करना होगा, इसलिए मैं क्षतिपूर्ति के लिए अपने नियोक्ता से वेतन वृद्धि की मांग करूंगा.‘

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एक बेहद नामचीन श्रृंखला के लिए 18 वर्षों से काम कर रहे नवीन पांडे दिल्ली के मूल निवासी हैं. पांडे रसोई और आउटलेट प्रबंधक हैं.  उन्होंने कहा, ‘अगर वे मेरा वेतन नहीं बढ़ाते हैं, तो मैं बेहतर संभावनाओं के साथ दूसरी जगह (रेस्तरां) में जा सकता हूं.‘ उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बीच, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने सोमवार को होटल और रेस्तरां को खाद्य बिलों में स्वचालित रूप से या डिफ़ॉल्ट रूप से सेवा शुल्क लगाने से रोक दिया और उल्लंघन के मामले में ग्राहकों को शिकायत दर्ज करने की अनुमति दी है. 

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इस फैसले को पूरे भारत में होटल व्यवसायियों, रेस्तरां मालिकों और संघों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, जिनमें से कुछ ने कहा कि यह कदम उनके व्यवसायों को ‘प्रभावित नहीं करेगा‘, जबकि अन्य ने आशंका जताई है कि इससे उनके राजस्व पर असर पड़ सकता है और उनके कर्मचारियों में असंतोष पैदा हो सकता है, जो अब तक हर महीने अपने हिस्से का सर्विस चार्ज पाने के आदी थे. 

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