हरियाणा में सिक्योरिटी कटौती पर सियासी संग्राम, दिग्विजय चौटाला बोले- JJP की रैली में भीड़ देख घबराई BJP

दिग्विजय चौटाला ने आरोप लगाया है कि 7 दिसंबर को जुलाना में हुई जजपा की सफल रैली से बीजेपी सरकार घबरा गई है. रैली की भारी भीड़ देखकर डीजीपी ओ पी सिंह ने हड़बड़ी में उनकी और उनके साथियों की सुरक्षा वापस ले ली.

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  • हरियाणा पुलिस ने 72 लोगों की सुरक्षा वापस लेकर 200 से अधिक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स को ड्यूटी से हटाया है
  • सुरक्षा समीक्षा के बाद अब केवल उन्हीं लोगों को सुरक्षा मिलेगी जिन्हें वास्तविक और प्रमाणित खतरा पाया जाएगा
  • जजपा नेता दिग्विजय चौटाला ने सुरक्षा वापस लेने को जजपा की रैली के बाद बीजेपी सरकार की प्रतिक्रिया बताया है
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चंडीगढ़:

हरियाणा पुलिस की हालिया सिक्योरिटी प्रूनिंग पहल ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है. थ्रेट और एक्सटॉर्शन कॉल के आधार पर दी गई सुरक्षा की जिला स्तर पर समीक्षा के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 72 लोगों की सुरक्षा वापस ले ली है और 200 से ज्यादा पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) को ड्यूटी से हटा लिया गया है. पुलिस का कहना है कि यह समीक्षा प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी और अब केवल उन्हीं लोगों को सुरक्षा दी जाएगी, जिनके लिए वास्तविक और प्रमाणित खतरा पाया जाएगा.

इस फैसले से जननायक जनता पार्टी (जजपा) खासी नाराज है. पार्टी नेता दिग्विजय चौटाला ने आरोप लगाया है कि 7 दिसंबर को जुलाना में हुई जजपा की सफल रैली से बीजेपी सरकार घबरा गई है. उनका कहना है कि रैली की भारी भीड़ देखकर डीजीपी ओ पी सिंह ने हड़बड़ी में उनकी और उनके साथियों की सुरक्षा वापस ले ली. दिग्विजय चौटाला ने दावा किया कि जजपा के चार नेताओं की सुरक्षा हटाई गई है, जबकि सभी को धमकियां मिलने के बाद ही सुरक्षा दी गई थी.

जजपा नेताओं को वास्तविक खतरा- दिग्विजय चौटाला

उन्होंने सिंगर और नेता राहुल फाजिलपुरिया के घर पर हुई फायरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि यह साफ दिखाता है कि जजपा नेताओं को वास्तविक खतरा है. दिग्विजय चौटाला ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि हरियाणा क्राइम के मामले में देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि अपहरण के मामलों का आंकड़ा 4500 पार कर चुका है और इस साल हत्या, लूट और डकैती की घटनाएं पहले से कहीं ज्यादा बढ़ी हैं.

डीजीपी द्वारा “बुलेट चलाने वालों” को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि बुलेट पर तो देश के गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी सवार हो चुके हैं, क्या वे भी गुंडे हैं? दिग्विजय चौटाला ने डीजीपी की सोच को “संकीर्ण” बताते हुए उनके पद पर बने रहने पर सवाल खड़े किए और कहा कि जजपा इस मामले में लीगल ओपिनियन लेकर जरूरत पड़ी तो पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी.

सिक्योरिटी के मुद्दे को दिया जा रहा राजनीतिक रंग- बीजेपी

वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपने पूर्व सहयोगी जजपा पर पलटवार किया है. कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि सिक्योरिटी के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस जांच के आधार पर ही सुरक्षा देती है और जो लोग सिक्योरिटी की आड़ में दबाव बनाने या खुद को ज्यादा स्मार्ट दिखाने की कोशिश करते हैं, उनसे सुरक्षा वापस ले ली जाती है. बीजेपी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जजपा सिक्योरिटी कटौती को राजनीतिक हथियार बनाकर सहानुभूति बटोरना चाहती है, जबकि हकीकत में सुरक्षा केवल जरूरत के आधार पर ही दी जाएगी.

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