'AI के दौर में ट्रांसलेशन 98% सटीक होना चाहिए', सोनम वांगचुक के भाषण का गलत अनुवाद करने पर भड़के जज

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की हिरासत मामले में केंद्र द्वारा पेश किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि AI के दौर में अनुवाद अत्यंत सटीक होना चाहिए. कोर्ट ने वास्तविक प्रतिलिपि मांगी. कपिल सिब्बल ने गलत अनुवाद का आरोप लगाया.

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सुप्रीम कोर्ट ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत से जुड़े मामले में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वीडियो ट्रांसक्रिप्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अदालत ने कहा कि AI के दौर में अनुवाद 98 प्रतिशत तक सटीक होना चाहिए, लेकिन सरकार द्वारा दिया गया अनुवाद इससे बिल्कुल मेल नहीं खाता.

सोमवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज से पूछा कि सरकार आखिर वह वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट क्यों नहीं दे रही, जिस पर कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई आधारित है. वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने यह तर्क दिया कि ट्रांसक्रिप्ट में कई ऐसे शब्द जोड़ दिए गए हैं, जो वांगचुक ने बोले ही नहीं.

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जो बात वांगचुक ने कही नहीं, वो ट्रांसक्रिप्ट में मौजूद

पीठ ने केंद्र से साफ कहा, 'भाषण की वास्तविक प्रतिलिपि चाहिए. आपका अनुवाद 7-8 मिनट लंबा है, जबकि भाषण केवल 3 मिनट का है. इतने अंतर के साथ किसी की स्वतंत्रता का सवाल नहीं तय किया जा सकता.'

कपिल सिब्बल ने सरकार के अनुवाद पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ट्रांसक्रिप्ट में नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाने जैसी बातें जोड़ दी गईं, जो वास्तविक वीडियो में मौजूद ही नहीं हैं.

इस पर ASG नटराज ने स्वीकार किया कि ट्रांसक्रिप्ट का काम एक अलग विभाग करता है और कहा हम इस क्षेत्र के विशेषज्ञ नहीं हैं. इस मामले पर अब गुरुवार को दोबारा सुनवाई होगी.

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केंद्र ने दी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी

सरकार ने पूर्व सुनवाई में बताया था कि वांगचुक की हिरासत के बाद से 24 बार चिकित्सकीय जांच की गई है और वे स्वस्थ, तंदुरुस्त और ठीक हैं. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि नजरबंदी का आदेश जारी रखने के सभी आधार अब भी बने हुए हैं, इसलिए स्वास्थ्य आधार पर रिहाई संभव नहीं.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई उनकी नजरबंदी को अवैध घोषित करने की मांग की गई है.

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