क्रोएशिया में 150 साल से पढ़ाई जा रही संस्कृत, DU में PM प्लेंकोविच ने बताया, कैसे बनी संबंधों का आधार

क्रोएशियाके प्रधानमंत्री आंद्रेई ने डीयू में संबोधन के दौरान बताया कि क्रोएशिया की जाग्रेब यूनिवर्सिटी में साल 1876 से ही संस्कृत पढ़ाई जा रही है.

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संस्कृत की गिनती दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में होती है. दुनिया के देशों की दूरियां पाटने और संबंधों को मजबूत बनाने में भी इसकी अहम भूमिका रही है. जानकर हैरानी होगी कि यूरोपीय देश क्रोएशिया में पिछले 150 साल से यूनिवर्सिटी में संस्कृत की पढ़ाई कराई जा रही है. ये बात क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेई प्लेंकोविच ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक व्याख्यान के दौरान बताई. 

जाग्रेब यूनिवर्सिटी में 1876 से पढ़ाई जा रही संस्कृत

भारत और क्रोएशिया के संबंधों पर लेक्चर के दौरान प्रधानमंत्री आंद्रेई ने बताया कि क्रोएशिया की जाग्रेब यूनिवर्सिटी में साल 1876 से ही संस्कृत पढ़ाई जा रही है. उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों का जीवंत प्रमाण बताया और प्रसिद्ध वेनेटियन खोजकर्ता मार्को पोलो का जिक्र करते हुए कहा कि सदियों पहले कई यात्रियों और विचारों ने एशिया और यूरोप को एकदूसरे से जोड़ा था. आज के दौर में वह भूमिका शिक्षा और ज्ञान निभा रहे हैं.

क्रोएशियाई पीएम की पहली डीयू यात्रा

क्रोएशियाई प्रधानमंत्री ने दिल्ली विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल की सराहना करते हुए इसे बेहद समृद्ध और प्रेरणादायक बताया. डीयू के कुलपति योगेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में भारत में क्रोएशिया के राजदूत पीटर लजुबिक भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. योगेश सिंह ने बताया कि क्रोएशिया के किसी प्रधानमंत्री की डीयू में यह पहली यात्रा है.

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भारत को बताया ग्लोबल लीडर

क्रोएशिया के पीएम प्लेंकोविच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत और यूरोप के बीच कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग को एक रफ्तार मिली है. उन्होंने डिजिटल टेक्नोलॉजी और एआई में भारत की तरक्की की तारीफ करते हुए कहा कि इन उपलब्धियों ने भारत को ग्लोबल लीडर्स की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है.

आपसी संबंधों में मजबूती का दिया हवाला

उन्होंने भारत और क्रोएशिया के बीच प्रगाढ़ होते व्यापारिक संबंधों और क्रोएशिया में भारतीय पर्यटकों की बढ़ती संख्या का जिक्र करते हुए इसे आपसी विश्वास और मजबूती का प्रतीक बताया. उन्होंने जानकारी दी कि शैक्षणिक आदान-प्रदान और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए जाग्रेब यूनिवर्सिटी के हिंदी अध्ययन विभाग के साथ एक समझौता भी किया गया है. 

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