समंदर की शक्ति 'समुद्र प्रताप': देश में बना सबसे बड़ा पॉल्यूशन कंट्रोल शिप कोच्चि में तैनात

जहाज में आग बुझाने के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi क्लास 1) भी लगा है. इसके अलावा इसमें डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम जैसे आधुनिक सिस्टम शामिल हैं.

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  • भारत ने स्वदेशी डिजाइन वाला पहला प्रदूषण नियंत्रण पोत आईसीजीएस समुद्र प्रताप भारतीय तटरक्षक में शामिल किया है.
  • समुद्र प्रताप जहाज की लंबाई सौ चौदह मीटर और चौड़ाई सोलह मीटर से अधिक है तथा यह आधुनिक तकनीक से लैस है.
  • यह जहाज तेल रिसाव और समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष उपकरणों से सुसज्जित है.
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भारत ने देश में ही बना एक ऐसा जहाज़ समुद्र में उतारा है, जिसका काम समुद्र को साफ-सुथरा प्रदूषण मुक्त रखना है. ये पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत आईसीजीएस समुद्र प्रताप है, जिसे भारतीय तटरक्षक में शामिल कर लिया गया है. इस जहाज को कमीशन देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया. यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, खोज और बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाएगा. इसे गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है. यह गोवा शिपयार्ड द्वारा बनाए गए दो प्रदूषण नियंत्रण जहाजों में से पहला है. देखा जाए तो यह कदम जहाज निर्माण और समुद्री क्षमता में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है.

समुद्र प्रताप का अर्थ है- समुद्रों की शक्ति. यह जहाज समुद्र को सुरक्षित, संरक्षित और स्वच्छ रखने के साथ-साथ देश के समुद्री हितों की रक्षा करने के भारतीय तटरक्षक बल के संकल्प को दर्शाता है. यह पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है. इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है. जहाज की लंबाई 114.5 मीटर और चौड़ाई 16.5 मीटर है. यह 40 किलोमीटर से अधिक की गति से चल सकता है. इसमें आधुनिक ऑटोमेशन व कंप्यूटर नियंत्रित सिस्टम लगे हैं. करीब 4,200 टन वजन वाला यह जहाज दो 7,500 किलोवाट डीजल इंजन से चलता है. इसमें स्वदेशी तकनीक से बने कंट्रोल पिच प्रोपेलर और गियर बॉक्स लगे हैं, जिससे जहाज को बेहतर नियंत्रण और लंबी दूरी तय करने की क्षमता मिलती है. यह जहाज 6,000 समुद्री मील तक बिना रुके चल सकता है. इसका मुख्य काम समुद्र में तेल रिसाव और प्रदूषण से निपटना है. इसके लिए इसमें आधुनिक उपकरण जैसे साइड स्वीपिंग आर्म्स, फ्लोटिंग बूम, हाई कैपेसिटी स्किमर, पोर्टेबल बार्ज और प्रदूषण जांच प्रयोगशाला मौजूद हैं.

जहाज में आग बुझाने के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi क्लास 1) भी लगा है. इसके अलावा इसमें डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम जैसे आधुनिक सिस्टम शामिल हैं. इसमें सुरक्षा के लिए 30 मिमी तोप और 12.7 मिमी की दो रिमोट कंट्रोल गन लगी हैं. आईसीजीएस समुद्र प्रताप कोच्चि में तैनात रहेगा और केरल व माहे क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण, समुद्री निगरानी और अन्य जिम्मेदारियां निभाएगा. फिलहाल जहाज की कमान डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल अशोक कुमार भामा के पास है. इसमें 14 अधिकारी और 115 जवान तैनात हैं. खास बात यह है कि इसमें पहली बार दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो पुरुष अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी.

इस जहाज के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की क्षमता काफी बढ़ेगी. साथ ही यह भारत के समुद्री क्षेत्रों में लंबी अवधि की निगरानी और राहत कार्यों को भी मजबूत बनाएगा. भारत में बना यह सबसे बड़ा और आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण जहाज समुद्र प्रताप, एक स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर समुद्री भविष्य की दिशा में देश की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक है.

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