- रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन एक लाख टन से अधिक क्रूड ऑयल लेकर मंगलुरु पहुंच चुका है.
- मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण क्रूड ऑयल और LPG की आपूर्ति प्रभावित हो रही है.
- एक्वा टाइटन ने पहले चीन के रिझाओ बंदरगाह को गंतव्य बताया था, लेकिन बाद में इसने रास्ता बदला.
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन एक लाख टन से अधिक क्रूड ऑयल लेकर मंगलुरु पहुंच चुका है. यह टैंकर पहले चीन जा रहा था. हालांकि बाद में इसे भारत की ओर मोड दिया गया. इस टैंकर में करीब 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है. एनडीटीवी के रिपोर्टर दीपक बोपन्ना मौके पर पहुंचे और उन्होंने बताया कि कैसे यह क्रूड ऑयल पोर्ट पर पहुंचता है. दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण क्रूड ऑयल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. हालांकि केंद्र सरकार लगातार कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने का लगातार प्रयास कर रही है.
एक्वा टाइटन क्रूड ऑयल लेकर के कल रात को मंगलुरु कोस्ट से 18 नॉटिकल मील की दूरी पर पहुंचा. जहां से क्रूड ऑयल को पाइपलाइन के जरिए पोर्ट तक भेजा जाएगा. पोर्ट पर एमआरपीएल फेसिलिटी है और जहां पर इस क्रूड ऑयल को प्रोसेस किया जाएगा.
जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज ने पहले चीन के बंदरगाह रिझाओ को अपना गंतव्य बताया था, लेकिन मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्वी एशियाई जलक्षेत्र में उसने अपना रास्ता बदल लिया. पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में विदेश सचिव राजेश सिन्हा ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि चीन जा रहा रूसी तेल टैंकर एक्वा टाइटन भारत की ओर मोड़ दिया गया है. इसमें 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है.
अमेरिका से LPG लेकर आया पाइक्सिस पायनियर
उधर, एलपीजी लेकर अमेरिका से एक मालवाहक जहाज पाइक्सिस पायनियर आज ही न्यू मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचा है. यह जहाज अमेरिका के टेक्सास स्थित नीदरलैंड से एलपीजी लेकर भारत आया है. ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट से एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. हालांकि भारत सरकार की ओर से लगातार अन्य जगहों से एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.
इससे पहले, 28 फरवरी को मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद पिछले 21 दिनों में चार भारतीय ध्वज वाले जहाज तेल और गैस का स्टॉक लेकर भारत पहुंच चुके हैं.
700 जहाज फंसे, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
इस बीच, भारत ने रूसी तेल की अपनी खरीद में भारी वृद्धि की है. यह कदम अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल के आयात को अस्थायी रूप से बढ़ाने की अनुमति देने के तुरंत बाद उठाया गया. ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के बाद आपूर्ति संबंधी चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से खरीद में यह उछाल आया है.
ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास दुनिया के करीब 700 जहाज पिछले कुछ दिनों से फंसे हुए हैं. इसके चलते मध्य पूर्व एशिया से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई होने वाला करीब 20% कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा है. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कई दिनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.














