- एनसीपी नेता रूपाली चाकंकर ने अशोक खरात से संबंधों के विवाद के बाद महिला शाखा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया
- रूपाली चाकंकर ने पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार से फोन पर बातचीत के बाद इस्तीफा देने का निर्णय लिया
- रूपाली चाकंकर ने पहले महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था
बलात्कार के आरोपी धर्मगुरु अशोक खरात से संबंध को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही एनसीपी नेता रूपाली चाकंकर ने शुक्रवार को पार्टी की महाराष्ट्र महिला शाखा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "श्आज सुबह (एनसीपी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री) सुनेत्रा पवार से फोन पर हुई बातचीत के बाद, मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की महिला शाखा के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रही हूं."
इससे पहले, खरात से संबंधों का खुलासा होने के बाद चाकंकर ने महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. सोशल मीडिया पर साझा किए गए पत्र में चाकंकर ने कहा कि उन्होंने खरात मामले पर पहले ही दिन अपना रुख स्पष्ट कर दिया था और इस बात पर जोर दिया था कि उनके वित्तीय लेन-देन या कथित कदाचार से उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है.
क्या है पूरा विवाद?
महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकंकर के कथित संबंध बलात्कार आरोपी अशोक खरात के साथ होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. इसके बाद उनके इस्तीफे की मांग लगातार तेज होती जा रही थी और कई दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी खुलकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. अशोक खरात, नासिक का एक स्वयंभू ज्योतिषी और अंकशास्त्री है, जिसे हाल ही में पुलिस ने एक 28 वर्षीय महिला की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने महिला को नशीला पदार्थ देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया.
ये भी पढ़ें :-शुद्धिकरण के नाम पर 38 साल की महिला...', अशोक खरात की एक और काली करतूत
वायरल तस्वीरों से बढ़ा विवाद
यह विवाद तब और गहरा गया जब सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें रूपाली चाकंकर को अशोक खरात के साथ देखा गया. इन तस्वीरों में उनके कथित तौर पर धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने की बात सामने आई है. इससे महिला आयोग जैसी संवेदनशील संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं. शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं को न्याय दिलाने वाली संस्था की प्रमुख का नाम ऐसे आरोपी के साथ जुड़ना बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण को 'एपस्टीन जैसे कांड' से जोड़ते हुए व्यापक जांच की मांग की. सुषमा अंधारे ने कहा कि चांकर के पास अब अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचा है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में महिलाएं न्याय की उम्मीद कैसे कर सकती हैं.
ये भी पढ़ें :- विधि का विधान... अपने कुकृत्यों को लेकर अशोक खरात की बेशर्म दलील, SIT के हाथ लगे 276 वीडियो














