शिवसेना से सीख: RJD का प्रस्ताव पास- दल का नाम या चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला लालू या तेजस्वी के पास

लालू प्रसाद ने सोमवार को ‘मंडल बनाम कमंडल’ की बहस को फिर से छेड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी पर समाज के सांप्रदायीकरण का तथा कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक न्याय एवं आरक्षण के खिलाफ होने का आरोप लगाया.

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राजद के राष्ट्रीय सम्मेलन के शुरुआती सत्र में लालू प्रसाद को पार्टी का फिर से अध्यक्ष चुना गया है.
नई दिल्ली:

सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने एक प्रस्ताव पारित किया. जिसके बाद भविष्य में दल का नाम या चुनाव चिन्ह संबंधित अंतिम निर्णय पार्टी सुप्रीमो लालू यादव या तेजस्वी यादव ही ले सकते हैं. इस प्रस्ताव के दो अर्थ लगाए जा रहे हैं. एक हाल में शिवसेना में जो कुछ भी विभाजन के दौरान हुआ या उसके बाद जो हुआ. दूसरा अगर आने वाले वर्षों में जनता दल यूनाइटेड के साथ विलय की कोई बात हो तो पहले से ये नेता अधिकृत हैं और पार्टी की कोई बैठक ना बुलानी पड़े या कोई नेता विवाद ना करे.

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बता दें कि राजद के राष्ट्रीय सम्मेलन के शुरुआती सत्र में लालू प्रसाद को पार्टी का फिर से अध्यक्ष चुना गया है. अध्यक्ष लालू प्रसाद ने सोमवार को ‘मंडल बनाम कमंडल' की बहस को फिर से छेड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर समाज के सांप्रदायीकरण का तथा कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक न्याय एवं आरक्षण के खिलाफ होने का आरोप लगाया.
प्रसाद ने यह दावा भी किया कि उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई विपक्षी दलों को एकजुट करने के उनके प्रयासों का नतीजा है.

उन्होंने 90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के लिए भाजपा के अभियान और उस दौर में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण के लिए चले आंदोलनों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा तभी से आरक्षण के खिलाफ रही है.

तेजस्वी यादव ने सोमवार को विपक्षी दलों से व्यक्तिगत अहंकार को किनारे रखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें यह फैसला करना होगा कि वे सत्तारूढ़ पार्टी के साथ हैं या उसके खिलाफ हैं. उन्होंने और उनके पिता लालू प्रसाद ने मोदी सरकार पर प्रहार तेज कर दिए हैं. (भाषा इनपुट के साथ)

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