जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में सुदूर गांव को आजादी के बाद पहली बार मिलेगा सड़क संपर्क

गांव के लोग अपने आसपास की पंचायतों एवं अन्य स्थानों के साथ सड़क संपर्क का आजादी के बाद से ही बाट जोह रहे हैं. चेल्ला डांगरी के लोगों को अब इस परियोजना के शीघ्र पूरा हो जाने की उम्मीद है.

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सड़क संपर्क की बाट जोह रहे चेल्ला डांगरी गांव के लोगों का इंतजार अब जल्द खत्म होने को है.
जम्मू:

जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में आजादी के बाद से सड़क संपर्क की बाट जोह रहे चेल्ला डांगरी गांव के लोगों का इंतजार अब जल्द खत्म होने को है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. एक अधिकारी ने बताया कि पुंछ के उपायुक्त यासिन एम चौधरी ने चेल्ला डांगरी को अटोली और फिर तहसील मुख्यालय से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण के काम का शनिवार को निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि गांव के लोग अपने आसपास की पंचायतों एवं अन्य स्थानों के साथ सड़क संपर्क का आजादी के बाद से ही बाट जोह रहे हैं. उन्होंने कहा कि चेल्ला डांगरी के लोगों को अब इस परियोजना के शीघ्र पूरा हो जाने की उम्मीद है.

माना जा रहा है कि यह सब 370 हटने के बाद प्रयासों का नतीजा है. जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार 11 दिसंबर को फैसला   सुनाएगा. अदालत 23 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा. 5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. 16 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला अदालत ने सुरक्षित रखा था. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का फैसला संवैधानिक है या नहीं. CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत का संविधान पीठ इस मामले पर फैसला सुनाने जा रहा है.

याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, दुष्यंत दवे राजीव धवन, दिनेश द्विवेदी, गोपाल शंकरनारायण समेत 18 वकीलों ने रखी दलीलें रखी. जबकि केंद्र और दूसरे पक्ष की ओर से AG आर वेंकटरमणी, SG तुषार मेहता, हरीश साल्वे, महेश जेठमलानी, मनिंदर सिंह, राकेश द्विवेदी ने दलीलें रखी. सरकार ने मुख्य तौर पर राज्य के विभाजन और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को शिथिल करने के लिए अपनाई गई संसदीय प्रक्रिया को पूरी तरह तर्क संगत और उचित बताया था. 

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