सांप्रदायिक सद्भाव ही असली 'केरल स्टोरी', NDTV पावर प्ले में बोले CM विजयन; केंद्र पर लगाया आरोप

मुख्यमंत्री विजयन ने केंद्र पर केरल के साथ भेदभावपूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास कार्यों के लिए केंद्र का सहयोग जरूरी है, लेकिन केरल को हमेशा नजरअंदाज किया गया.

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  • NDTV केरलम पावर प्ले में सीएम ने कहा कि असली केरल स्टोरी देखनी है तो हमारे यहां सांप्रदायिक सद्भाव को देखें
  • केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य को बदनाम करने की कोशिश का आरोप लगाया है
  • विजयन ने केंद्र सरकार पर केरल के साथ सौतेला व्यवहार करने और जरूरत के वक्त मदद न देने का आरोप लगाया
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NDTV के केरलम पावर प्ले कार्यक्रम में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने 'केरल स्टोरी' मूवी और इसके सीक्वल का जिक्र करते हुए कहा कि असली केरला स्टोरी देखनी है तो हमारे यहां सांप्रदायिक सद्भाव को देखें, गरीबी मुक्त गांवों में देखें. 

केंद्र पर खराब बर्ताव का लगाया आरोप

सीएम विजयन ने केरल को विकास की राह पर ले जाने में अपनी सरकार के योगदान का जिक्र किया. साथ ही बीजेपी की अगुआई वाली केंद्र सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप भी लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जरूरत के वक्त केरल की मदद नहीं की. सीएम ने आरोपों में कहा कि हमने हर कदम पर केंद्र सरकार के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश की, लेकिन केरल के साथ हमेशा ही खराब बर्ताव किया गया. उन्होंने 2018 की भीषण आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त भी प्रधानमंत्री दौरा करने आए, लेकिन राज्य को केंद्र से जिस मदद की जरूरत थी, वो नहीं मिली. 

विजयन ने कहा कि नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते गुजरात में प्राकृतिक आपदा आई थी, तब अन्य राज्यों के साथ केरल ने भी मदद की थी. लेकिन जब केरल को जरूरत पड़ी तो उसे अकेला छोड़ दिया गया. मुख्यमंत्री ने केंद्र पर केरल के साथ भेदभावपूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास कार्यों के लिए केंद्र का सहयोग जरूरी है, लेकिन केरल को हमेशा नजरअंदाज किया गया.

हाइवे, पाइपलाइन प्रोजेक्टों का हवाला दिया

उन्होंने नेशनल हाईवे और गेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए दावा किया नेशनल हाईवे अथॉरिटी जमीन की ऊंची कीमतों का हवाला देकर केरल में प्रोजेक्ट से पीछे हट रही थी. लेकिन राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया और अपने खजाने से प्रोजेक्ट की कुल लागत की 25 प्रतिशत रकम देने का फैसला किया. उसके बाद ही काम शुरू हो सका. इसी तरह गेल पाइपलाइन प्रोजेक्ट को भी सरकार ने दखल देकर सफलतापूर्वक पूरा कराया.

मैं पार्टी का सुप्रीम लीडर नहींः विजयन

राजनीतिक नेतृत्व के सवाल पर विजनय ने कहा कि वे खुद को सुप्रीम लीडर नहीं मानते. पार्टी ही सभी बड़े फैसले लेती है. पार्टी तय करती है कि क्या किया जाना है और वह केवल चुनाव और विकास कार्यों के लिए नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य के विकास के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर संबंधों की जरूरत होती है, लेकिन केंद्र का रवैया केरल के प्रति हमेशा निराशाजनक रहा है.

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सीएम ने बताया, कैसे बदली केरल की सूरत

2016 में सत्ता संभालने के समय के हालात का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उस वक्त राज्य गहरे संकट में था. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्र पूरी तरह बदहाली की कगार पर थे. कई सरकारी स्कूल बंद होने वाले थे. अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर थे और न ही बुनियादी सुविधाएं. हम सत्ता में आए तो हमने सुनिश्चित किया कि लोगों की जरूरत की हर चीज मिले. सीएम ने कहा कि केरल के लाखों लोग राज्य से बाहर काम करते हैं. पहले जब वो यहां आते थे, तब उन्हें लगता था कि राज्य में कुछ नहीं बदला जा सकता, लेकिन पिछले वर्षों में उनकी सरकार ने इस धारणा को बदलने में सफलता हासिल की है. 

केरल को निवेश के अनुकूल बनाया

निवेश के माहौल पर मुख्यमंत्री विजयन ने कहा कि पहले केरल को निवेश के लिए अनुकूल नहीं माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. नीति आयोग ने राज्य को लगातार निवेश के अवसरों में सुधार के लिए पहले स्थान पर रखा है. हाल ही में कोचीन में हुई इन्वेस्टमेंट समिट में 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं. उन्होंने कुल निवेश का आंकड़ा करीब 3.63 लाख करोड़ रुपये बताते हुए कहा कि निवेशक केरल इसलिए आना चाहते हैं क्योंकि यहां शांति है और पिछले कई वर्षों में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है.

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शिक्षा, स्वास्थ्य क्षेत्रों में बदलाव किया

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में आए बदलावों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों से छात्रों का पलायन रुक गया है और 10 लाख नए छात्रों ने सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है. कोविड महामारी के दौरान जब विकसित देशों तक में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, तब केरल मजबूती से खड़ा रहा और समय पर लोगों को सुविधाएं पहुंचाईं. उन्होंने बताया कि केरल में शिशु मृत्यु दर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, जो राज्य की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है.

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