जेडीयू में आरसीपी सिंह की वापसी से क्या बिहार में बदलेंगे सियासी समीकरण?

बिहार में अगले कुछ दिन सियासी नजरिए से काफी रोचक रहने वाले हैं. खबर है कि कभी नीतीश कुमार के बेहद विश्वासपात्र रहे आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी हो सकती है.

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आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
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  • मकर संक्रांति के बाद आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी की खबर है
  • आरसीपी सिंह जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं
  • कहा जा रहा है कि जल्द ही CM नीतीश कुमार के बेटे निशांत को भी राजनीति में लाने की तैयारी है
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नई दिल्ली:

मकर संक्रांति यानि 14 जनवरी के बाद बिहार की राजनीति में बहुत कुछ बदलने वाला है. सबसे बड़ी खबर है कि नीतीश कुमार के एक समय के सबसे विश्वसनीय और बेहद करीबी आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी हो रही है. एक समय में जदयू में नंबर दो की हैसियत रखने वाले आरसीपी सिंह दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने, थोड़े दिनों के लिए बीजेपी में भी रहे, केन्द्र में मंत्री भी बने, फिर अपनी पार्टी बनाई और पिछले दिनों बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त जन सुराज के साथ थे.

कब वापस लौटेंगे आरसीपी?

जन सुराज से उनकी बेटी चुनाव भी लड़ीं, मगर हार गईं. आरसीपी सिंह की दूसरी बेटी आईपीएस हैं. उनके जदयू में वापसी की खबरों को तब बल मिला, जब नीतीश कुमार और आरसीपी दोनों पटेल सेवा संघ के दही-चूड़ा कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां पर आरसीपी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो और नीतीश कुमार एक ही हैं. उनका 25 सालों का साथ है और नीतीश कुमार उनके अभिभावक हैं. एनडीटीवी से बातचीत में आरसीपी ने जेडीयू में जाने की बात का खंडन नहीं किया. इतना जरूर कहा कि बहुत नीला पीला हो चुके हैं, अब कुछ अच्छा ही होगा. पीला से उनका तात्पर्य जन सुराज से था.

राजनीति में पिछड़े समाज का चेहरा

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले कई लोग मानते हैं कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू में पिछड़े समाज का कोई बड़ा चेहरा नहीं है और आरसीपी उसमें फिट बैठते हैं. नीतीश कुमार उन पर काफी भरोसा भी करते रहे हैं. उन्होंने नौकरशाह होते हुए और बाद में राजनैतिक सहयोगी के तौर पर उनके साथ काम किया, कुर्मी जाति से आते हैं और नालंदा के ही रहने वाले हैं. दूसरी सबसे अहम बात ये है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जेडीयू में लाने की तैयारी हो रही है. उसके लिए नीतीश कुमार के आसपास विश्वासपात्र कुर्मी नेताओं का होना जरूरी है.

निशांत कुमार के लिए बनाएंगे रास्ता 

इसी कड़ी में एक और नाम है मनीष वर्मा का, जो आईएएस की नौकरी छोड़कर नीतीश कुमार के साथ जुड़े हैं. मनीष वर्मा का कहना है कि निशांत को कब राजनीति में आना है, यह नीतीश कुमार और निशांत तय करेंगे. ऐसे में यह माना जा रहा है कि जेडीयू की राजनीति में आरसीपी सिंह एक धागे का काम करेंगे और उनका काम होगा जेडीयू में पिछड़ों की राजनीति को एक बार फिर से मजबूत करना. जानकार मानते हैं कि जेडीयू में यह करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि नीतीश कुमार का वोट बैंक ही पिछड़ा और अति पिछड़ा है. अब जेडीयू में निशांत कुमार के लिए रास्ता बनाना और उन्हें बिहार की राजनीति में स्थापित करने की जिम्मेवारी आरसीपी सिंह और मनीष वर्मा जैसे बैकरूम वॉयज पर ही होगी.

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