राम मंदिर, धारा 370, नक्सल फ्री इंडिया... BJP के वो बड़े वादे जो 12 साल में मोदी सरकार ने किए पूरे

अब जब मोदी सरकार नक्सल मुक्त भारत का सपना साकार करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रही है तो यह जानना मौजूं होगा कि बीते 12 साल में मोदी सरकार ने किन-किन बड़ी उपलब्धियों को हासिल किया, जिसका वादा कर बीजेपी सत्ता में आई थी. 

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मोदी सरकार की वो बड़ी उपलब्धियां, जिसका वादा कर सत्ता में आई थी बीजेपी.
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  • नक्सल मुक्त भारत का सपना साकार कर मोदी सरकार एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रही है.
  • इससे पहले भी मोदी सरकार ने राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक जैसे कई बड़े वादों को पूरा किया है.
  • एक नजर डालते हैं मोदी सरकार की उन उपलब्धियों पर, जिसका वादा कर बीजेपी सत्ता में आई थी.
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नई दिल्ली:

16 मई, 2014 को भारत में लोकसभा चुनाव के लिए हुई वोटों की गिनती हुई. 10 साल से सत्ता में काबिज कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को करारी हार मिली और भारत के चुनावी इतिहास में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई. इस चुनाव का परिणाम कुछ ऐसा था कि बीजेपी अकेले दम पर भी सरकार बना और चला सकती थी. इस चुनाव से पहले विपक्ष में रही बीजेपी ने प्रचार अभियान के दौरान देश से कई बड़े वादे किए. जिसमें अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 समाप्त करना, तीन तलाक समाप्त करना, नक्सल मुक्त भारत बनाना सहित कई अन्य शामिल थे. 

अब 31 मार्च 2026 को केंद्र की मोदी सरकार अपने एक बड़े वादे को पूरा करने का जा रही है. यह वादा है- नक्सल मुक्त भारत का. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल मुक्त भारत के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की थी. अमित शाह द्वारा यह समयसीमा तय किए जाने के बाद कई बड़े नक्सली कमांडरों ने सरेंडर किए, कई नक्सली कमांडर एनकाउंटर में मारे गए. 

अब जब मोदी सरकार नक्सल मुक्त भारत का सपना साकार करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रही है तो यह जानना मौजूं होगा कि बीते 12 साल में मोदी सरकार ने किन-किन बड़ी उपलब्धियों को हासिल किया, जिसका वादा कर बीजेपी सत्ता में आई थी. 


1. राम मंदिर

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण वो वादा है, जिसने बीजेपी को देश की सत्ता दिलाई. इसे भारत के कानूनी इतिहास का सबसे लंबा और चर्चित केस भी कहा जाता है. सालों तक इस मुद्दें पर विवाद भी रहा. लेकिन बीजेपी शुरू से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर सबसे मुखर रही. साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला दिया. जिसके तहत पूरी विवादित ज़मीन राम मंदिर के लिए हिंदू याचिकाकर्त्ताओं को दे दी जबकि मस्जिद के लिए कहीं और जमीन आवंटित कर दी.

सु्प्रीम कोर्ट के फैसले के बाद  5 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना करते हुए राम मंदिर का शिलान्यास किया. फिर 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में नागर शैली में निर्मित राम मंदिर का उद्घाटन किया गया, जो 200 वर्ष पुरानी गाथा के पूरा होने का प्रतीक था जिसने भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाला.

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2. धारा 370

1947 में भारत को आजादी तो मिली तो अंग्रेजों ने जाते-जाते कई गहरे जख्म भी दे दिए. जिसमें भारत का विभाजन, रियासतों का स्वतंत्र देश के रूप में रहना तक शामिल था. आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर कुछ दिनों तक स्वतंत्र देश के रूप में रहा. लेकिन जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया तब तत्कालीन सरकार ने वहां के राजा की एक अहम शर्त मानते हुए जम्मू-कश्मीर को भारत में शामिल कराया. 

संविधान के धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष लाभ प्राप्त था, इससे कश्मीर विकास के मामले में लगातार पिछड़ता जा रहा था. 2014 के चुनाव से पहले बीजेपी जम्मू-कश्मीर से धारा 370 समाप्त करने का वादा कर चुकी थी. जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली भारतीय संविधान की धारा 370 को 5 अगस्त 2019 को समाप्त (निरस्त) कर दिया गया था. इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही राज्य का विशेष दर्जा खत्म हो गया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया.

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3. तीन तलाक

भारत में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) एक साथ तीन बार 'तलाक' बोलकर (या लिखकर/डिजिटल माध्यम से) पत्नी को तलाक देने की प्रथा थी, जिसे 1 अगस्त 2019 से अवैध और दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत यह 3 साल तक की जेल और जुर्माने वाला गैर-जमानती अपराध है। 

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया था, जिसके बाद 2019 में कानून बनाकर इसे पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया. सजा का प्रावधान: तीन तलाक देने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है.

4. महिला आरक्षण

लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने का मामला भी भारत में काफी लंबे समय से अटका था. इसे अलग-अलग समय पर अलग-अलग सरकारों ने लागू करवाने की कोशिश तो की, लेकिन सफलता मोदी सरकार को मिली. 

महिला आरक्षण बिल के इतिहास को देखें तो पिछले करीब तीन दशकों से यह बिल संसद के इस सदन से दूसरे सदन का चक्कर काट रही है.1996 में पहली बार यूनाईटेड फ्रंट की सरकार के समय पहली बार यह बिल लाया गया था, मगर तब इसका जमकर विरोध हुआ. फिर 1998,1999, 2002, 2003 में भी इसे पास कराने की असफल कोशिश होती रही मगर आम राय नहीं बन पाया.

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महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप मोदी सरकार की तरफ से सितंबर 2023 में लाया गया और दोनों सदनों से पारित हुआ. किसी पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया और नारी वंदन बिल लोकसभा में 454-0 और राज्यसभा में 214-0 से पास हुआ. अब 2029 के चुनाव से पहले महिला आरक्षण दिए जाने की योजना पर काम जारी है. 

5. नक्सल मुक्त भारत

वामपंथी उग्रवाद सालों तक भारत की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती हुआ करता थी. इसे भारत के कई दुश्मन देशों से भी मदद मिल रही थी. उत्तर में नेपाल की सीमा से लेकर दक्षिण में आंध्र प्रदेश तक आदिवासी, जंगली इलाकों में लाल आतंक का बोलबाला था, जिसमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का बड़ा हिस्सा शामिल था. 

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माओवादी प्रभाव ने भारत के एक बड़े हिस्से को सालों तक विकास के उजाले से दूर रखा. लेकिन अब भारत लगभग-लगभग नक्सल मुक्त हो चुका है. सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा बाकी है. लेकिन 2013 में 126 जिलों तक फैला नक्सल मार्च 2025 तक में घटकर 18 रह गई. जिनमें से केवल 6 को ही "सबसे अधिक प्रभावित" के रूप में वर्गीकृत किया गया है. 

इस बीच गृह मंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 का डेडलाइन तय किए जाने के बाद बीत कुछ महीनों में भारत से बड़ी तेजी से नक्सलियों का अंत होना शुरू हुआ. लाल आतंक की समाप्ति क साथ-साथ छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के जंगली और आदिवासी इलाकों में विकास की रफ्तार तेज होगी.  

6. CAA

पड़ोसी देशों से अवैध तरीके से भारत में आए लोग भी भारत की आंतरिक सुरक्षा का एक बड़ा मुद्दा है. बांग्लादेश से सटे राज्यों में यह समस्या अति गंभीर है. इस समस्या से पार पाने के लिए मोदी सरकार ने 11 मार्च 2024 को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को अधिसूचित किया. जिसके तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का कानून है. यह कानून धार्मिक उत्पीड़न के कारण आए प्रवासियों को नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा देता है.

बाद में इस कानून पर काफी विवाद भी हुआ. लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता नहीं छीनता है. यह कानून नागरिकता प्रदान करने के लिए है, न कि रद्द करने के लिए. इसके माध्यम से लंबे समय से प्रताड़ित शरणार्थियों को सम्मानजनक जीवन और मूलभूत अधिकार मिलेंगे. यह कानून 2019 में संसद द्वारा पारित किया गया था, और अब इसके नियम जारी होने के बाद लागू हो गया है.

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