- मिडिल ईस्ट के संकट के कारण वैश्विक तेल और गैस की स्थिति खराब हुई है, जिसका प्रभाव भारत पर भी पड़ा है
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा तनाव के बावजूद किसी भी तरह की ढिलाई बरतना उचित नहीं होगा
- युद्धविराम के बावजूद मिडिल ईस्ट की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है
मिडिल ईस्ट के संकट ने तमाम देशों की सिरदर्दी बढ़ा दी है, दुनिया में तेल और गैस का संकट गहरा गया है. जिसके असर से भारत भी पूरी तरह अछूता नहीं है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्धविराम के बीच भारत की सतर्कता पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एकदम साफ संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि फिलहाल को मौजूदा हालात को देखते हुए किसी भी तरह की ढिलाई बरतना सही नहीं होगा और सरकार संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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रक्षा मंत्री मिडिल ईस्ट संकट पर क्या बोले
संघर्ष को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही वहां औपचारिक रूप से युद्धविराम लागू हो गया है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए यह मान लेना उचित नहीं होगा कि संकट पूरी तरह समाप्त हो चुका है. उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और आगे किस तरह का मोड़ ले सकती है, इस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है. राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि देश में किसी भी तरह के संकट से निपटने के लिए पर्याप्त भंडार और संसाधन उपलब्ध हैं.
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सरकार की कितनी तैयारी, रक्षा मंत्री ने बताया
उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसी किसी भी परिस्थिति से निपटने की पूरी तैयारी है, चाहे हालात कैसे भी हों. रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में किसी भी तरह का संकट उत्पन्न न हो, यहां तक कि आने वाले दो से तीन महीनों के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भी सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं. साथ ही उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आपूर्ति से जुड़ी तैयारियों को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है.
(एएनआई इनपुट्स के साथ)














