चेन पुलिंग करने वालों पर रेलवे का एक्‍शन, 20 हजार से ज्‍यादा गिरफ्तार, वसूला एक करोड़ का जुर्माना

हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि ऑपरेशन समय पालन का लक्ष्य ट्रेन की टाइमिंग में बढ़ोतरी करना है. ऐसा देखने में आया कि ट्रेन सही समय पर गंतव्य पर नहीं पहुंच पाती, जिसके पीछे बड़ी वजह अलार्म चेन पुलिंग का बेजा इस्तेमाल है.

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  • रेलवे ने ट्रेन में बिना कारण चेन पुलिंग करने वालों के खिलाफ ऑपरेशन समय पालन चलाकर सख्त कार्रवाई की है.
  • पिछले वर्ष अलार्म चेन पुलिंग के गलत इस्तेमाल को लेकर 14 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां की गई हैं.
  • ऑपरेशन के तहत जनवरी से पंद्रह मार्च तक उत्तर रेलवे क्षेत्र में दो हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया.
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नई दिल्ली:

ट्रेन में सफर के दौरान बिना वजह चेन पुलिंग करने वालों के खिलाफ रेलवे ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. इसके तहत रेलवे ने अभियान चलाकर लोगों की गिरफ्तारी की और जुर्माना वसूला है. रेल मंत्रालय के निर्देश पर आरपीएफ ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों पर शिकंजा कसा है, जो बिना किसी ठोस कारण के चलती ट्रेन को चेन पुलिंग करके रोक देते हैं. रेलवे ने चेन पुलिंग के आरोप में करीब 20 हजार लोगों को गिरफ्तार किया है. वहीं एक करोड़ से ज्‍यादा का जुर्माना वसूला गया है. 

ऑपरेशन 'समय पालन' के तहत रेलवे ने एक करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना वसूला है. वहीं, देशभर में इस अभियान के तहत जुर्माने की राशि कई करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है. उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि पिछले साल अलार्म चेन पुलिंग (ACP) का गलत इस्तेमाल करने वाले 16 हजार से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया, जिनमें से 14 हजार से ज्यादा लोगों को जेल भेजा गया और 58 लाख रुपए से अधिक की जुर्माना राशि भी वसूली गई. 

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ऑपरेशन 'समय पालन' क्यों चलाया जा रहा?

हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि ऑपरेशन समय पालन का लक्ष्य ट्रेन की टाइमिंग में बढ़ोतरी करना है. ऐसा देखने में आया कि ट्रेन सही समय पर गंतव्य पर नहीं पहुंच पाती, जिसके पीछे बड़ी वजह अलार्म चेन पुलिंग का बेजा इस्तेमाल है. इसी प्रक्रिया को रोकने के लिए आरपीएफ ऑपरेशन 'समय पालन' चला रहा है, जहां एसीपी का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ रेलवे कानून के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. 

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रेलवे अधिकारी के अनुसार, बड़े शहरों के बाहरी इलाकों, उनके आसपास और कुछ दूरदराज क्षेत्रों में ट्रेन में चेन पुलिंग की घटनाएं अधिक होती थीं. कई बार अपराधी कोई वारदात करने के बाद चेन खींचकर ट्रेन रोक देते थे और मौके से भाग जाते थे, लेकिन अभियान की वजह से ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई है और स्थिति में सुधार भी देखने को मिला है.

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अलार्म चेन पुलिंग से ट्रेनों को कितना नुकसान?

सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि अगर अलार्म चेन पुलिंग कर दी जाए तो कम से कम उस ट्रेन का दस से पंद्रह मिनट नुकसान होता है. इस कारण से न सिर्फ वो ट्रेन अपने समय से पीछे हो जाती है बल्कि उसके पीछे की भी ट्रेनों की पंक्चुअलिटी प्रभावित होती है. 

नियम के अनुसार, बिना उचित कारण के चेन पुलिंग रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 141 के तहत अपराध है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर 1000 रुपए तक का जुर्माना या एक साल तक की जेल हो सकती है.

रेलवे ने कसा शिकंजा?

उत्तर रेलवे ने एक जनवरी 2026 से 15 मार्च के बीच बिना कारण चेन पुलिंग करने वाले 2254 लोगों को हिरासत में लिया और इनसे करीब 6 लाख 52 हजार 650 रुपए जुर्माना राशि के तौर पर वसूला है. उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-2026 फरवरी के बीच 9 हजार 911 लोगों को गिरफ्तार किया और 32 लाख 90 हजार 534 रुपए जुर्माना लिया है. पूर्व मध्य रेलवे ने एक मार्च से 15 मार्च के बीच 514 लोगों को हिरासत में लिया और जुर्माने के रूप में इनसे 1 लाख 46 हजार रुपए वसूल किए. 

किस डिवीजन में कितने मामले?

उत्तर रेलवे के क्षेत्र में 1 जनवरी 2026 से 15 मार्च के बीच सबसे अधिक मामले दिल्ली में 839 लोग, लखनऊ 474, मुरादाबाद 304, अंबाला 296, फिरोजपुर 271 और जम्मू में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया. एनसीआर में प्रयागराज में 4945, झांसी में 2167 और आगरा में 2799 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ईसीआर (ECR) क्षेत्र में सर्वाधिक 230 लोग दानापुर मंडल में पकड़े गए जबकि समस्तीपुर मंडल में 101, पं. दीन दयाल उपाध्याय मंडल में 73, सोनपुर मंडल में 66 और धनबाद मंडल में 44 लोगों को हिरासत में लिया गया.

ट्रेनों की समयबद्धता दर 77%

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे ने 2025-26 के दौरान सभी जोनों में ट्रेनों की समयबद्धता दर 77% से अधिक हासिल की है. वर्तमान जोनों में से केवल तीन जोनों में ही समयबद्धता का स्तर 90% से अधिक रहा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार (27 मार्च) को राज्यसभा में बताया कि अन्य आधे दर्जन से अधिक जोनों में ट्रेनों के संचालन में 77% से 90% के बीच समयबद्धता बनी रही.

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उन्होंने सदन को बताया कि समय की पाबंदी कई कारकों से प्रभावित हुई है, जिनमें कोहरा, मार्गों पर प्रतिबंध, संपत्ति रखरखाव और अलार्म चेन खींचना, आंदोलन और पशुओं के कुचलने जैसी अन्य समस्याएं शामिल हैं. इन चुनौतियों के बावजूद, साल 2025-26 के दौरान केवल 1.3% ट्रेनें तीन घंटे से अधिक लेट हुईं, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 1.4% था.

सांसद एमबी वासनिक के एक प्रश्न के उत्तर में वैष्णव ने कहा, “समय की पाबंदी में सुधार के लिए, रेलवे समय सारिणी का युक्तिकरण करता है. ऐसा ही एक अभ्यास आईआईटी मुंबई की सहायता से उनके ट्रैफिक सिमुलेटर का उपयोग करके किया गया था. इस अभ्यास का उद्देश्य सभी डिवीजन पर निश्चित इंट्रीग्रेटेड रखरखाव ब्लॉक स्थापित करना था ताकि देरी को कम किया जा सके और समय की पाबंदी में सुधार किया जा सके.”

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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रेलवे विभिन्न मार्गों पर उपनगरीय और मालगाड़ियों सहित प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें संचालित करता है. हालांकि, दिल्ली-हावड़ा और मुंबई-हावड़ा जैसे प्रमुख मार्ग अन्य मार्गों के साथ-साथ अत्यधिक भीड़भाड़ वाले रहते हैं, जिससे ट्रेनों के समय पर चलने में बाधा आती है.

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