रायचूर में देवेंद्रप्पा स्वामी की खुदकुशी से हर कोई हैरान, भोजन कक्ष में मिला शव

गडग जिले के गजेंद्रगढ़ के गुलगुली गांव के निवासी, देवेंद्रप्पा पिछले 20 वर्षों से सिंधानूर तालुक में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे. वे अपने परिवार से दूर रह रहे थे, और उनकी आत्महत्या का सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है.

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  • कर्नाटक के रायचूर जिले में 58 वर्षीय धर्मगुरु देवेंद्रप्पा स्वामी ने अपने मठ में फांसी लगाकर आत्महत्या की.
  • देवेंद्रप्पा स्वामी बस्सपुर गांव में जगद्गुरु शिवानंद मठ के पीठाधिपति थे और सरकारी शिक्षक भी थे.
  • मुल्लूर गांव के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत थे और अवसाद से पीड़ित बताए जा रहे हैं.
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कर्नाटक के रायचूर जिले में शुक्रवार को एक 58 वर्षीय धर्मगुरु ने अपने मठ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे स्थानीय लोग सदमे में हैं. मृतक की पहचान देवेंद्रप्पा स्वामी (58) के रूप में हुई है, जो जिले के सिंधानूर तालुक के बस्सपुर (ईजे) गांव स्थित जगद्गुरु शिवानंद मठ के पीठाधिपति थे. पुलिस के अनुसार, कथित तौर पर अवसाद से पीड़ित देवेंद्रप्पा स्वामी ने सरकारी सेवा में रहते हुए मठ की स्थापना की थी. वे मुल्लूर (ईजे) गांव के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत थे.

समय के साथ, उनमें सांसारिक जीवन से वैराग्य का भाव विकसित हुआ और उन्होंने मठ की स्थापना की. स्कूल के बाद, वे शाम को मठ में धार्मिक प्रवचन देते थे. मूल रूप से गडग जिले के गजेंद्रगढ़ के गुलगुली गांव के निवासी, देवेंद्रप्पा पिछले 20 वर्षों से सिंधानूर तालुक में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे. वे अपने परिवार से दूर रह रहे थे, और उनकी आत्महत्या का सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है. हालांकि, ग्रामीणों को लगता है कि अवसाद इसका संभावित कारण हो सकता है.

उनका शव मठ के भोजन कक्ष में लटका हुआ मिला. तुरविहाल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है. उल्लेखनीय है कि 2022 में, कथित तौर पर यौन उत्पीड़न कांड में अपना नाम घसीटे जाने से दुखी होकर, गुरु मदिवालेश्वर मठ के पीठाधिपति बसवा सिद्धलिंग स्वामीजी ने कर्नाटक के बेलगावी जिले के नेगिनाहला गांव में अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

चित्रदुर्ग मठ में महिलाओं और लड़कियों के शोषण के बारे में दो महिलाओं की कथित बातचीत का ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों महिलाओं ने बातचीत में दिवंगत बसवा सिद्धलिंग स्वामीजी का नाम लिया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान पर कलंक लगा.

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इस घटनाक्रम से दुखी होकर आत्महत्या करने वाले स्वामीजी ने बेलगावी जिले के बायलाहोंगला के पुलिस उपाधीक्षक से शिकायत दर्ज कराई थी और लिंगायत संतों को निशाना बनाने वाले स्वार्थी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

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