आप तमिल जनता की आवाज को नहीं दबा सकते... विजय की 'जन नायकन' के समर्थन में उतरे राहुल गांधी

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘मिस्टर मोदी, आप तमिल लोगों की आवाज दबाने में कभी कामयाब नहीं होंगे.’’

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  • राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तमिल फिल्म जन नायकन को रोककर तमिल संस्कृति पर हमला करने का आरोप लगाया है.
  • मद्रास उच्च न्यायालय ने जन नायकन फिल्म को सीबीएफसी की मंजूरी देने के एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी है.
  • फिल्म के निर्माता ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की है.
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि अभिनेता विजय की फिल्म 'जन नायकन' को ‘रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश' तमिल संस्कृति पर हमला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘तमिल लोगों की आवाज दबाने' में कभी कामयाब नहीं होंगे. गांधी की ये टिप्पणियां उस दिन आई हैं जब वह तमिलनाडु के दौरे पर हैं, जहां अभिनेता-नेता विजय की तमिल फिल्म को लेकर विवाद एक बड़ा मुद्दा बन गया है.

फिल्म के निर्माता ने मद्रास उच्च न्यायालय के नौ जनवरी के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है. इस अंतरिम आदेश में एकल न्यायाधीश के उस निर्देश पर रोक लगा दी गई थी जिसमें फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की मंजूरी देने का आदेश दिया गया था.

मद्रास उच्च न्यायालय के इस फैसले से राजनीतिक पहलुओं को लेकर चर्चा में रही इस फिल्म का भविष्य अधर में लटक गया है. राहुल गांधी ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सूचना और प्रसारण मंत्रालय की 'जन नायकन' को रोकने की कोशिश तमिल संस्कृति पर हमला है.''

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘मिस्टर मोदी, आप तमिल लोगों की आवाज दबाने में कभी कामयाब नहीं होंगे.''

केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने पिछले शुक्रवार को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के आदेश के खिलाफ अपील की है. विजय ने कुछ महीने पहले अपना राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) बनाया है और ‘जन नायकन' को विजय के राजनीति में पूरी तरह से प्रवेश से पहले उनकी आखिरी फिल्म के तौर पर बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार फिल्म पोंगल के अवसर पर नौ जनवरी को रिलीज़ होने वाली थी.

हालांकि, सीबीएफसी के समय पर प्रमाणपत्र जारी नहीं करने के बाद फिल्म को आखिरी समय में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. नौ जनवरी को, खंडपीठ का आदेश उस समय आया जब न्यायमूर्ति पी टी आशा ने सीबीएफसी को फिल्म 'जन नायक' को मंजूरी देने का निर्देश दिया, और फिल्म बोर्ड के मामले को समीक्षा समिति के पास भेजने के निर्देश को खारिज कर दिया.

मुख्य न्यायाधीश एम एम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने सीबीएफसी द्वारा दायर अपील पर एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ अंतरिम रोक लगा दी.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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