पुतिन-मोदी की जोड़ी दे रही क्या संकेत? दोनों की बॉन्डिंग देख हिली दुनिया, 24 घंटे में अग्निपरीक्षा

भारत को तकनीक के साथ एस 500, सुखोई 57, सस्ता तेल, रूस के साथ बड़े स्तर पर व्यापार जैसी चीजें चाहिए तो पुतिन को भी भारत से बड़ी उम्मीदें हैं.

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  • पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए दोनों देशों की मित्रता को समय की कसौटी पर खरा बताया
  • पुतिन को मोदी ने पालम एयरपोर्ट से सीधे अपने सरकारी बंगले ले जाकर व्यक्तिगत और मित्रवत संबंधों का प्रदर्शन किया
  • रूस ने मोदी के इस स्वागत को अप्रत्याशित बताया और दोनों नेताओं की दोस्ती से हैरानी जताई है
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अपने मित्र, राष्ट्रपति पुतिन का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है. आज शाम और कल हमारी बातचीत का बेसब्री से इंतजार है. भारत-रूस मित्रता समय की कसौटी पर खरी उतरी है और इससे हमारे लोगों को बहुत लाभ हुआ है.

अपने दोस्त को पालम एयरपोर्ट से सीधे अपने सरकारी बंगले ले गए पीएम मोदी ने रास्ते से ही ये ट्वीट किया. साथ में तड़के के तौर पर कई तस्वीरें भी थीं. दोनों की दोस्ती सरकारी कम और पर्सनल ज्यादा लग रही थी. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कभी इतना खुश आपने शायद ही देखा होगा. यहां तक की कार में उन्होंने पीएम मोदी के साथ सेल्फी भी ली.

दोनों दोस्तों की जुगलबंदी से रूस भी हैरान हुआ. रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय ने ट्वीट कर बताया कि पीएम मोदी ने उन्हें चौंका दिया. उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि पीएम मोदी खुद राष्ट्रपति पुतिन को लेने पालम एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं. पीएम मोदी अपनी ही कार में बैठाकर राष्ट्रपति पुतिन को अपने निवास भी ले गए.

पुतिन के भारत आने के तुरंत बाद ये दो बयान ये बताने के लिए काफी है कि भारत और रूस के संबंध किस स्तर के हैं. साथ ही ये भी बताने के लिए काफी है कि पुतिन का इस बार का भारत दौरा बहुत मायनों में खास है. यूक्रेन को लेकर अमेरिका के साथ पुतिन ने अब तक कोई डील नहीं किया है. साथ ही भारत पर भी लगातार अमेरिका, यूरोप और पीछे-पीछे यूक्रेन पिछले काफी दिनों से ये दबाव डाल रहे हैं कि भारत अपने दोस्त रूस से दूर रहे. मगर, भारत ने ये साफ कर दिया है कि रूस के साथ उसकी दोस्ती की ऊंचाई नापी नहीं जा सकती.

हालांकि, किसी भी रिश्ते की पहचान जमीन पर हुए समझौतों से होती है. भारत और रूस फिलहाल कई तरह की समस्याओं से घिरे हुए हैं. दोनों को एक-दूसरे की जरूरत है. मगर इस दोस्ती में कई रुकावटें भी हैं. ये बाहरी, कूटनीतिक और वित्तीय हैं. ऐसे में दोनों को समझदारी दिखाते हुए एक-दूसरे को मजबूत करना होगा. ऐसा लगता है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन इस बात को समझ चुके हैं और इसकी राह निकाल रहे हैं.

24 घंटे में अग्निपरीक्षा

5 दिसंबर इन दोनों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा. शक्रवार को ही पता चलेगा कि मोदी-पुतिन ने भारत-रूस के लिए क्या तय किया और कैसे दोनों दुनिया को संतुलित करने पर आगे बढ़ने वाले हैं. भारत को तकनीक के साथ एस 500, सुखोई 57, सस्ता तेल, रूस के साथ बड़े स्तर पर व्यापार जैसी चीजें चाहिए तो पुतिन को भी भारत से बड़ी उम्मीदें हैं. अब ये दोनों नेता ही शुक्रवार को बता पाएंगे कि वे कैसे और कहां तक बढ़ने वाले हैं. पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है.  

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