- पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस के सौ पन्नों के हलफनामे पर तीखी टिप्पणी की
- कोर्ट ने DGP पंजाब को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश
- प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक मामले में मोहाली SSP की तैनाती पर सवाल उठाए गए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में मंगलवार को पंजाब की कानून‑व्यवस्था पर अहम सुनवाई हुई. सुनवाई गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और राणा बलाचौरिया के मामले में थी. इस दौरान पंजाब पुलिस ने करीब 100 पन्नों का जवाब दाखिल किया, जिस पर अदालत ने तीखी मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें 100 पन्नों के हलफनामे नहीं चाहिए, जमीन पर काम दिखना चाहिए. अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली, वीवीआईपी सुरक्षा, और जिम्मेदारियों की तयशुदा जवाबदेही पर कई सख्त सवाल उठाए.
अगली सुनवाई 18 फ़रवरी; DGP को VC से पेश होने के निर्देश
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को तय की है और DGP पंजाब को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने का आदेश दिया है. साथ ही, पंजाब पुलिस को कुल बल की संख्या, पेट्रोलिंग व डिप्लॉयमेंट का रिव्यू, और प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक (PM Security Lapse) संबंधी मुख्य रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं.
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PM सुरक्षा चूक: ‘जिम्मेदार अफ़सर मोहाली के SSP—क्यों?'
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक में जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल हैं, उनमें से एक को मोहाली SSP जैसी सेंसिटिव पोस्ट पर क्यों तैनात किया गया है. सरकारी वकील ने कहा कि सरकार उनकी सेवाओं से संतुष्ट है. इस पर कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी की—“आप संतुष्ट हैं? अब हम देखेंगे.” अदालत ने निर्देश दिया कि मोहाली SSP के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की जाए.
हाईकोर्ट की सख़्त बातें: “कहने से नहीं, करने से होगा”
सरकार हर बात पर ‘हम करेंगे' कह रही है, लेकिन अब काम करने की जरूरत है. हमें जमीनी कार्रवाई चाहिए, 100 पन्नों के हलफनामे नहीं. कोर्ट ने साफ़ कहा कि एसएसपी स्तर तक जवाबदेही तय होनी चाहिए, क्योंकि लगातार घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं.
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DGP का पक्ष: बल, वीवीआईपी सुरक्षा और निरंतर समीक्षा
DGP पंजाब ने कोर्ट को बताया कि राज्य पुलिस बल में कुल 71,500 पुलिसकर्मी हैं और VVIP सुरक्षा में 4,600 कर्मियों की ड्यूटी है. DGP के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है. कोर्ट ने पूछा कि मोहाली में कितनी पुलिस तैनात है; इस पर DGP सही संख्या नहीं बता सके और कहा कि तैनाती जनसंख्या और क्षेत्र के हिसाब से होती है.
बिक्रम मजीठिया पेशी के दौरान ‘कोर्ट स्टाफ से मारपीट'—सिर्फ़ चार्जशीट काफ़ी नहीं
हाईकोर्ट ने बिक्रम मजीठिया की पेशी के दौरान कोर्ट कर्मचारी से मारपीट के मामले पर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. मोहाली पुलिस से पूछा गया कि अब तक किस‑किस की स्टेटमेंट दर्ज हुई और क्या सबूत जुटाए गए? सरकारी पक्ष (नानक सिंह) ने बताया कि चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. अदालत ने कहा कि केवल चार्जशीट दाखिल करना कार्रवाई नहीं माना जा सकता; FIR से चालान के बाद तक क्या कदम उठाए गए, यह भी बताया जाए. संबंधित पुलिसकर्मी को लाइन हाजिर कर दिया गया है और विभागीय जांच जारी है—यह जानकारी अदालत को दी गई.
फिरौती कॉल की बाढ़: 279 शिकायतें, कार्रवाई का लेखा‑जोखा मांगा
DGP हेल्पलाइन पर अब तक 279 फिरौती कॉल की शिकायतें आने की जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई. हाईकोर्ट ने पूछा कि इन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, कितनी रिकवरी/गिरफ्तारियां हुईं और नेटवर्क डिस्मेंटलिंग के लिए क्या कदम उठाए गए? इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत केस‑वाइज़ रिपोर्ट मांगी गई.
ट्रांसफर‑पोस्टिंग और फोर्स डिप्लॉयमेंट पर कोर्ट के स्पष्ट निर्देश
अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था को मैदान‑स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए इन निर्देशों पर अमल कहा कि इंस्पेक्टर स्तर से ऊपर के अधिकारियों की एक ही जिले में तैनाती 3 साल से अधिक न हो. पूरे बल, पेट्रोलिंग यूनिट्स और स्थाई/अस्थाई सुरक्षा डिप्लॉयमेंट की री‑असेसमेंट रिपोर्ट पेश की जाए.मोहाली कोर्ट‑स्टाफ मारपीट केस में FIR के बाद की अद्यतन केस‑डायरी कोर्ट के समक्ष रखी जाए.
PM सुरक्षा चूक—तीन अफसरों पर चार्जशीट; लेकिन…
DGP पंजाब ने बताया कि तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. साथ ही, सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 11 अगस्त 2022 को SC जांच समिति की रिपोर्ट सरकार को मिली थी, और 2024 में रिटायर्ड जज जस्टिस सत प्रकाश को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया. कोर्ट ने कहा कि पिछले कदम पर्याप्त हैं या नहीं, यह प्रेज़ेंट‑डे सिक्योरिटी गैप्स के आधार पर आंका जाएगा—ग्राउंड‑लेवल इम्प्लिमेंटेशन दिखे.
‘ऑपरेशन प्रहार' पर हाईकोर्ट की नसीहत: “निर्दोष न फंसे”
हाईकोर्ट ने DGP गौरव यादव से कहा कि ऑपरेशन प्रहार के दौरान किए जाने वाले राउंड‑अप में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान न किया जाए. अदालत ने साफ़ किया कि कानून का कठोर पक्ष तभी प्रभावी होगा, जब कार्रवाई लक्षित, प्रमाण‑आधारित और निष्पक्ष हो.
अन्य संज्ञान: कबड्डी फेडरेशन हत्याकांड और तरनतारन छात्र हत्या
अदालत ने कबड्डी फेडरेशन से जुड़े हत्या मामले और तरनतारन के एक छात्र की हत्या पर भी चिंता जताई. ऐसे मामलों और उकसावे/हिंसा को महिमामंडित करने वाले गीतों/कंटेंट पर निगरानी बढ़ाने को कहा.
कागज नहीं, नतीजे चाहिए
हाईकोर्ट का केंद्रीय संदेश स्पष्ट रहा: “फाइलों से ज़्यादा, मैदान में बदलाव चाहिए.” अदालत ने जवाबदेही को एसएसपी स्तर तक तय करने, VVIP सुरक्षा से लेकर जिला‑स्तरीय पेट्रोलिंग तक की री‑ऑडिट रिपोर्ट माँगी और 18 फ़रवरी 2026 को DGP पंजाब की वर्चुअल पेशी सुनिश्चित करने को कहा. आने वाली तारीख़ पर पेश रिपोर्ट ही तय करेगी कि काग़ज़ी वादों के आगे जमीनी परिणाम कितनी तेज़ी से दिखते हैं.














